मंडी सहित प्रदेशभर में छोटे बच्चों की सुरक्षित देखभाल के साथ महिलाओं को रोजगार, शिक्षा और आत्मनिर्भरता से जुड़ने का मिल रहा अवसर।
छोटे बच्चों की देखभाल की चिंता अब कई कामकाजी महिलाओं के लिए कम हो रही है। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार द्वारा मिशन शक्ति के तहत संचालित पालना योजना महिलाओं और बच्चों के लिए एक मजबूत सहारा बन रही है।
इस योजना के तहत स्थापित आंगनबाड़ी-सह-क्रेच केंद्र छोटे बच्चों को सुरक्षित, पोषणयुक्त और सीखने के अनुकूल वातावरण उपलब्ध करा रहे हैं। वहीं, इन केंद्रों की सुविधा से महिलाएं रोजगार, स्वरोजगार, शिक्षा और अन्य कार्यों में अधिक आत्मविश्वास के साथ जुड़ पा रही हैं।
दरमियाना क्रेच केंद्र बना मिसाल
बाल विकास परियोजना मंडी-सदर के अंतर्गत संचालित आंगनबाड़ी-सह-क्रेच केंद्र दरमियाना इसका बेहतर उदाहरण है।
यहां वर्तमान में 24 बच्चों की प्रतिदिन सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक देखभाल की जा रही है। छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों को पौष्टिक भोजन, आराम, खेल-खेल में शिक्षा और नियमित स्वास्थ्य निगरानी जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।
माताओं की चिंता हुई दूर
बिलासपुर जिले के बंदला निवासी छायावंती, जो अपने पति के साथ मंडी में मेहनत-मजदूरी करती हैं, बताती हैं कि पहले काम पर जाते समय बच्चों की सुरक्षा सबसे बड़ी चिंता होती थी।
उन्होंने कहा कि कई बार मजबूरी में बच्चों को कमरे में छोड़कर जाना पड़ता था, लेकिन क्रेच सुविधा मिलने के बाद अब वे अपने बच्चों को केंद्र में छोड़कर निश्चिंत होकर काम कर पाती हैं।
मंडी निवासी सुजाता वालिया ने बताया कि बेटी की देखभाल को लेकर पहले काफी चिंता रहती थी। अब क्रेच केंद्र में सुरक्षित वातावरण, भोजन और सीखने की सुविधा मिलने से वह बिना परेशानी नौकरी कर पा रही हैं।
वंदना ठाकुर ने कहा कि पहले बच्चे की जिम्मेदारी के कारण उनकी पढ़ाई और नौकरी प्रभावित होती थी, लेकिन अब क्रेच सुविधा मिलने से वह प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी और नौकरी पर ध्यान दे पा रही हैं।
वहीं, सैलून का काम करने वाली रेनू ठाकुर ने बताया कि अब वह भरोसे के साथ अपने बच्चे को केंद्र में छोड़कर अपना काम कर पाती हैं।
बच्चों के विकास पर विशेष ध्यान
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मीनाक्षी ने बताया कि पहले केंद्र में तीन से छह वर्ष तक के बच्चे आते थे, लेकिन पालना योजना के तहत अब छह माह से छह वर्ष तक के बच्चों को भी सुविधा दी जा रही है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में क्रेच केंद्र में 24 और आंगनबाड़ी केंद्र में 11 बच्चे हैं। बच्चों को दोपहर का भोजन, सुबह का नाश्ता, फल और शाम के स्नैक्स उपलब्ध करवाए जाते हैं।
क्रेच कार्यकर्ता पूर्णिमा राणा के अनुसार बच्चों को सुरक्षित शैक्षणिक खिलौनों के माध्यम से खेल-खेल में सीखने का अवसर दिया जाता है। हर माह बच्चों का वजन और लंबाई मापकर उनके स्वास्थ्य और विकास की निगरानी की जाती है।
मंडी जिले में 10 केंद्र संचालित
जिला कार्यक्रम अधिकारी (महिला एवं बाल विकास) अजय बद्रेल ने बताया कि मंडी जिले में मिशन शक्ति के तहत पालना योजना के अंतर्गत वर्तमान में 10 आंगनबाड़ी-सह-क्रेच केंद्र संचालित किए जा रहे हैं।
इनमें:
उन्होंने बताया कि सभी केंद्रों में आवश्यक स्टाफ तैनात किया जा चुका है। अधिक महिलाओं तक सुविधा पहुंचाने के लिए विभाग ने 12 नए क्रेच केंद्रों का प्रस्ताव सरकार को भेजा है।
पालना योजना केवल बच्चों की देखभाल तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाने का माध्यम भी बन रही है।
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