नूरपुर
हिमाचल प्रदेश के नूरपुर वन मंडल के तहत ज्वाली रेंज की गुरियाल बीट में वन विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर गहरे विवादों में घिर गई है। क्षेत्र में खैर के बेशकीमती पेड़ों को नियमों के विरुद्ध जड़ से उखाड़ने और बिना वैध अनुमति के लकड़ी को खुर्द-बुर्द करने का संगीन मामला सामने आया है।
इस पूरे प्रकरण में स्थानीय फॉरेस्ट गार्ड की कार्यप्रणाली पर मिलीभगत के गंभीर आरोप लग रहे हैं।
मौके पर लोड हो रही थी बिना अनुमति की लकड़ी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरियाल बीट में खैर के कई पेड़ों को जड़ से उखाड़ा गया। जब मीडिया की टीम मौके पर पहुँची, तो वहां एक निजी गाड़ी में खैर के माछों को लोड किया जा रहा था।
पूछताछ के दौरान ठेकेदार के मुंशी ने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए बताया कि वन रक्षक (फॉरेस्ट गार्ड) के मौखिक आदेश पर ही यह लकड़ी लोड कर रैहन ले जाई जा रही है। हैरानी की बात यह है कि मौके पर लकड़ी के परिवहन या डंप से जुड़ा कोई भी वैध दस्तावेज़ मौजूद नहीं था।
जांच में खुली पोल: गायब मिले 'संपत्ति मार्क'
सूचना मिलने पर रैहन ब्लॉक के अधिकारी जीवन सिंह ने मौके पर पहुँचकर जांच शुरू की। निरीक्षण के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए।
नियमों का उल्लंघन: ठेकेदार के डंप स्थल पर रखी खैर की लकड़ी और हार्ट वुड (Heart Wood) पर अनिवार्य 'संपत्ति मार्क' (Property Mark) नदारद थे।
अनुमति से अधिक कटान: प्राथमिक दृष्टि में उखाड़े गए पेड़ों की संख्या स्वीकृत अनुमति से कहीं अधिक प्रतीत हो रही है।
संदिग्ध निर्देश: बिना किसी लिखित परमिट के फॉरेस्ट गार्ड द्वारा लकड़ी को दूसरे स्थान पर शिफ्ट करने के निर्देश देना विभागीय मिलीभगत की ओर इशारा करता है।
फॉरेस्ट गार्ड के बयानों में विरोधाभास
जब इस संबंध में संबंधित फॉरेस्ट गार्ड से पूछताछ की गई, तो शुरुआत में उनके पास कोई संतोषजनक जवाब नहीं था। बाद में उन्होंने 'डैमेज रिपोर्ट' काटने और लकड़ी को सुरक्षित रखने का दावा किया, लेकिन बिना संपत्ति मार्क के लकड़ी का ठेकेदार के डंप पर मिलना उनके दावों को खारिज करता है।
संपर्क करने पर भी मौन रहा विभाग
इस संवेदनशील मामले पर पक्ष जानने के लिए जब वन मंडल अधिकारी (DFO) नूरपुर, संदीप कोहली से फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने कॉल का कोई जवाब नहीं दिया। अधिकारियों की यह चुप्पी विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर रही है।
पुराना है नूरपुर वन मंडल का विवादों से नाता
गौरतलब है कि नूरपुर वन मंडल की विभिन्न बीटों में अवैध कटान के मामले पहले भी सुर्खियां बटोर चुके हैं। बावजूद इसके, बार-बार ऐसी अनियमितताओं का सामने आना यह दर्शाता है कि वन माफिया और कुछ विभागीय कर्मचारियों के बीच का गठजोड़ क्षेत्र की वन संपदा को खोखला कर रहा है।