800 मेगावाट परियोजना ने डिजाइन क्षमता से 558 मिलियन यूनिट अधिक बिजली बनाई, बेहतर संचालन और तकनीकी दक्षता से मिली उपलब्धि
एनटीपीसी की कोलडैम जलविद्युत परियोजना ने बिजली उत्पादन के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। बिलासपुर-मंडी सीमा पर स्थित 800 मेगावाट क्षमता वाली इस परियोजना ने वित्त वर्ष 2025-26 में 3612.82 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन कर पिछले 10 वर्षों का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाया है।
वर्ष 2015 में व्यावसायिक संचालन शुरू होने के बाद यह परियोजना का अब तक का सर्वाधिक वार्षिक बिजली उत्पादन है। परियोजना ने अपनी 3054.79 मिलियन यूनिट डिजाइन ऊर्जा क्षमता से करीब 558 मिलियन यूनिट अधिक बिजली पैदा कर नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
यह उपलब्धि बेहतर तकनीकी संचालन, कम फोर्स्ड आउटेज, उच्च क्षमता उपयोग और कर्मचारियों की टीमवर्क का परिणाम मानी जा रही है।
51.55 प्रतिशत रहा प्लांट लोड फैक्टर
रिकॉर्ड उत्पादन के साथ कोलडैम परियोजना ने पूरे वर्ष 51.55 प्रतिशत प्लांट लोड फैक्टर (PLF) हासिल किया। वहीं घोषित क्षमता का उपयोग 100.53 प्रतिशत रहा।
परियोजना में अनियोजित शटडाउन यानी फोर्स्ड आउटेज केवल 0.27 प्रतिशत दर्ज किया गया, जो बेहतर रखरखाव और कुशल संचालन को दर्शाता है।
पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में परियोजना ने 3353.11 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन किया था। इस बार उत्पादन में करीब 260 मिलियन यूनिट की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
अब तक 35.27 बिलियन यूनिट से अधिक बिजली उत्पादन
18 जुलाई 2015 को व्यावसायिक संचालन शुरू होने के बाद कोलडैम परियोजना ने 26 जुलाई 2026 तक 35.27 बिलियन यूनिट से अधिक बिजली उत्पादन कर लिया है।
चालू वित्त वर्ष 2026-27 में भी परियोजना ने 26 जुलाई तक 1083.14 मिलियन यूनिट बिजली उत्पादन कर लिया है।
अप्रैल और मई में परियोजना ने 100 प्रतिशत क्षमता हासिल की, जबकि जून और जुलाई में भी घोषित क्षमता से बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया गया।
कई राज्यों को मिल रही बिजली
सतलुज नदी पर स्थित कोलडैम परियोजना से उत्पादित बिजली हिमाचल प्रदेश के अलावा हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और चंडीगढ़ को भी उपलब्ध करवाई जाती है।
परियोजना प्रमुख ने टीम को दी बधाई
एनटीपीसी कोलडैम के परियोजना प्रमुख एस.एस. राव ने कहा कि 3612.82 मिलियन यूनिट उत्पादन का रिकॉर्ड पूरी टीम की प्रतिबद्धता, तकनीकी दक्षता और बेहतर संचालन का परिणाम है।
उन्होंने कहा कि भविष्य में भी परियोजना सुरक्षित, विश्वसनीय और अधिकतम क्षमता के साथ स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन जारी रखेगी।
कोलडैम क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन के प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा। इसके लिए एनटीपीसी कोलडैम ने आईआईटी बॉम्बे के साथ संयुक्त शोध पहल शुरू की है।
परियोजना प्रमुख एसएस राव ने बताया कि एनटीपीसी का उद्देश्य केवल बिजली उत्पादन तक सीमित नहीं है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक विकास को भी प्राथमिकता देना है।
उन्होंने बताया कि शोध के निष्कर्ष भविष्य की पर्यावरणीय नीतियों और ऊर्जा परियोजनाओं के लिए उपयोगी साबित होंगे।
मंडी और सोलन में प्रस्तावित होंगे पम्प्ड स्टोरेज प्लांट
एनटीपीसी ने मंडी और सोलन जिलों में प्रस्तावित दो पम्प्ड स्टोरेज पावर प्लांट (PSP) परियोजनाओं की प्रारंभिक व्यवहार्यता रिपोर्ट तैयार कर हिमाचल प्रदेश सरकार को भेज दी है।
इन परियोजनाओं से प्रदेश में हरित ऊर्जा उत्पादन के साथ-साथ बिजली भंडारण क्षमता को भी मजबूती मिलेगी।
40 गांवों में 5.5 करोड़ के सीएसआर कार्य
एसएस राव ने बताया कि कोलडैम परियोजना से प्रभावित 40 गांवों में सीएसआर के तहत करीब 5.5 करोड़ रुपये के विकास कार्य करवाए गए हैं।
इस अवसर पर वर्ष 2025-26 में किए गए सीएसआर कार्यों पर आधारित पत्रिका 'सामाजिक सरोकार' का विमोचन भी किया गया।
कार्यक्रम में एचआर प्रमुख मंगला हरिंदरन, डिप्टी जनरल मैनेजर (सीएसआर) अंजुला अग्रवाल, एजीएम योगेश शर्मा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
क्या है पम्प्ड स्टोरेज परियोजना?
पम्प्ड स्टोरेज परियोजना एक जलविद्युत आधारित ऊर्जा भंडारण प्रणाली है। इसमें दो जलाशयों का निर्माण किया जाता है।
जब बिजली की मांग कम होती है तो निचले जलाशय का पानी पंप करके ऊपरी जलाशय में पहुंचाया जाता है। वहीं, बिजली की मांग बढ़ने पर यही पानी नीचे छोड़ा जाता है, जिससे टरबाइन चलती हैं और बिजली उत्पादन होता है।
यह प्रणाली नवीकरणीय ऊर्जा के बेहतर उपयोग और बिजली आपूर्ति को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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