मंडी।
राष्ट्रीय उच्च मार्ग (NH) के निर्माण कार्य ने धर्मपुर के साथ लगते बनाल क्षेत्र के ग्रामीणों की नींद उड़ा दी है। पिछले दो वर्षों से अनसुलझी समस्याओं के बीच अब अगली बरसात सिर पर है, जिससे स्थानीय लोगों में कंपनी और प्रशासन के खिलाफ भारी रोष है।
हिमाचल किसान सभा के नेता एवं पूर्व जिला पार्षद भूपेंद्र सिंह ने प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर बताया कि अवैध डंपिंग और अनियोजित कटिंग के कारण रियूर अनुसूचित जाति एवं ओबीसी बस्ती सहित बनाल गांव के लगभग डेढ़ दर्जन घरों पर ढहने का खतरा बरकरार है।
अवैध डंपिंग और तबाही की आहट
भूपेंद्र सिंह ने आरोप लगाया कि निर्माण कंपनी और ठेकेदारों द्वारा मलबे की अवैध डंपिंग धड़ल्ले से जारी है। पिछली बरसात में भी यह मलबा बहकर चलाल और धर्मपुर में भारी तबाही मचा चुका है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो इस बार भी बरसात में मलबे का सैलाब नीचे बसे क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले लेगा। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन केवल मूकदर्शक बना हुआ है।
प्रशासनिक अनदेखी और अधूरे वादे
हैरानी की बात यह है कि पिछले साल दिसंबर में एक उच्च स्तरीय जांच दल और स्थानीय विधायक ने क्षेत्र का निरीक्षण किया था। उस समय सभी लंबित सुरक्षा कार्यों, जैसे सुरक्षा दीवारें (Retaining Walls) और रास्तों के निर्माण को मार्च माह तक पूरा करने का लक्ष्य दिया गया था।
लेकिन मई आधा बीत जाने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है। ज्ञान चंद, रूप लाल, पवन कुमार और मीरां सकलानी सहित कई ग्रामीणों के घर असुरक्षित हैं और वे पिछले एक साल से किराए के मकानों में रहने को मजबूर हैं।
विधायक और ठेकेदार के गठजोड़ पर सवाल
भूपेंद्र सिंह और किसान सभा के पदाधिकारियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि सड़क निर्माण और सुरक्षा दीवारों का काम अब कथित तौर पर स्थानीय विधायक के करीबी समर्थक ठेकेदार को दे दिया गया है।
लोगों का कहना है कि इसी 'राजनीतिक संरक्षण' के कारण कंपनी मनमानी कर रही है और प्रशासन ने अपनी आंखें मूंद ली हैं। ठेकेदार द्वारा पेयजल स्रोतों, हैंडपंपों और पुश्तैनी रास्तों को भी तोड़ दिया गया है, जिन्हें अभी तक ठीक नहीं किया गया।
आंदोलन की चेतावनी
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि यदि बरसात शुरू होने से पहले उनके घरों की सुरक्षा के लिए पुख्ता दीवारें नहीं लगाई गईं, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। भूपेंद्र सिंह ने घोषणा की कि अगले दो दिनों में कुमाहरडा तक के सभी प्रभावित परिवारों से संपर्क किया जाएगा, जिसके बाद एक बड़े जन-आंदोलन की शुरुआत की जाएगी।
जनता का कहना है कि अब वे आश्वासन नहीं, बल्कि धरातल पर ठोस कार्रवाई चाहते हैं।