पांवटा साहिब से सतौन और रेणुका जी को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क पर शरयार के पास लगातार हो रहे भूस्खलन ने यातायात व्यवस्था को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पिछले करीब सात दिनों से सड़क पर मलबा गिरने का सिलसिला जारी है, जिसके कारण लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। पहाड़ी से लगातार मलबा गिरने के चलते सड़क बार-बार बंद हो रही है।
दिन के समय कभी-कभार कुछ समय के लिए सड़क को यातायात के लिए खोला जाता है, लेकिन कुछ ही देर बाद दोबारा मलबा गिरने से रास्ता बंद हो जाता है। सड़क बंद होने के कारण बस सेवा भी बुरी तरह प्रभावित हुई है, जबकि बड़ी संख्या में वाहन बीच रास्ते में फंस रहे हैं। यात्रियों और वाहन चालकों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।
सड़क की बदहाल स्थिति से परेशान स्थानीय लोगों ने इसके वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल कर प्रशासन और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। लोगों ने मांग की है कि इस संवेदनशील हिस्से का जल्द स्थायी समाधान किया जाए, ताकि बार-बार यातायात बाधित न हो।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभाग की ओर से केवल जेसीबी भेजकर मलबा हटाने की औपचारिकता पूरी की जा रही है। भूस्खलन प्रभावित हिस्से में सुरक्षा दीवार, उचित ड्रेनेज सिस्टम और अन्य स्थायी सुरक्षा इंतजाम नहीं किए गए हैं। यही वजह है कि मलबा हटाने के कुछ समय बाद ही सड़क दोबारा बंद हो जाती है।
लोगों का कहना है कि विभाग की कार्रवाई फिलहाल अस्थायी उपायों तक ही सीमित है, जबकि समस्या के स्थायी समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। लगातार भूस्खलन के कारण इस मार्ग से गुजरने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
यह सड़क पांवटा साहिब, सतौन और रेणुका जी क्षेत्र के लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसके अलावा पंजाब और हरियाणा से रेणुका जी आने वाले श्रद्धालु भी इसी मार्ग का इस्तेमाल करते हैं। सड़क बाधित होने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ मरीजों, विद्यार्थियों, कर्मचारियों और श्रद्धालुओं को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि करीब 34 वर्षों से यह सड़क विकास की राह देख रही है, लेकिन बार-बार भूस्खलन, जर्जर सड़क और कमजोर सुरक्षा व्यवस्था के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है।
लोगों के अनुसार, इस संबंध में कई बार शिकायतें, प्रदर्शन और नारेबाजी की जा चुकी है, लेकिन हर बार आश्वासन मिलने के बाद मामला शांत हो जाता है और धरातल पर स्थिति जस की तस बनी रहती है।
लोगों ने सरकार, जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से सवाल किया है कि आखिर कब तक जेसीबी भेजकर मलबा हटाने की खानापूर्ति की जाती रहेगी और शरयार के इस संवेदनशील हिस्से का स्थायी उपचार कब होगा।
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि शरयार के भूस्खलन प्रभावित हिस्से का तत्काल वैज्ञानिक सर्वेक्षण करवाकर स्थायी सुरक्षा कार्य किए जाएं। साथ ही सुरक्षा दीवार, ड्रेनेज और अन्य जरूरी तकनीकी उपाय किए जाएं, ताकि भविष्य में बार-बार सड़क बंद होने की समस्या से निजात मिल सके।
लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया गया तो वे आंदोलन को और तेज करने के लिए मजबूर होंगे।
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