कांग्रेस ने 422 मेगावाट परियोजना को बताया हिमाचल के लिए बड़ी उपलब्धि, भाजपा के सवालों पर भी साधा निशाना
दिल्ली में किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना को लेकर छह राज्यों के बीच समझौते पर हस्ताक्षर के बाद हिमाचल प्रदेश की सियासत गरमा गई है। भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को इसका श्रेय लेने से बचने की नसीहत दिए जाने के बीच हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रदेश प्रवक्ता सुशांत कपरेट ने समझौते को प्रदेश के लिए बड़ी
उपलब्धि बताया है। कपरेट ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को इस पूरी प्रक्रिया का प्रमुख सूत्रधार करार दिया।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के मुख्यमंत्रियों ने 15 सितंबर 2026 को किशाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना समझौते पर हस्ताक्षर किए।
परियोजना के तहत टोंस नदी पर 232.6 मीटर ऊंचे कंक्रीट ग्रेविटी बांध का निर्माण प्रस्तावित है। आधिकारिक जानकारी में 1,562 मिलियन क्यूबिक मीटर जल भंडारण, 97 हजार हेक्टेयर सिंचाई और 1,476 मिलियन यूनिट जलविद्युत उत्पादन का उल्लेख किया गया है।
कांग्रेस ने मुख्यमंत्री सुक्खू को दिया श्रेय
सुशांत कपरेट ने कहा कि किशाऊ परियोजना हिमाचल प्रदेश के लिए ऐतिहासिक महत्व रखती है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के दृढ़ संकल्प और प्रदेश के हितों की रक्षा के प्रति प्रतिबद्धता के कारण यह समझौता संभव हो पाया है।
कपरेट ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के पास जल, वन और प्राकृतिक संसाधनों के रूप में अमूल्य संपदा है। मुख्यमंत्री ने इन संसाधनों की सुरक्षा और उचित उपयोग सुनिश्चित करने के लिए लगातार प्रयास किए हैं। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश के अधिकारों और आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए समझौते को आगे बढ़ाया गया है।
भाजपा के सवालों पर कांग्रेस का पलटवार
कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता ने परियोजना को लेकर भाजपा की ओर से उठाए जा रहे सवालों पर भी पलटवार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा नेताओं को बताना चाहिए कि उनकी सरकार के समय किशाऊ परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए क्या कदम उठाए गए थे।
कपरेट ने कहा कि किशाऊ परियोजना की पहली डीपीआर वर्ष 1985 में तैयार हुई थी, लेकिन कई दशक बीतने के बाद 2026 में जाकर समझौते पर हस्ताक्षर हुए। उनके अनुसार, लंबे समय से लंबित इस परियोजना को आगे बढ़ाने में वर्तमान सरकार ने निर्णायक भूमिका निभाई है।
हिमाचल के हितों की रक्षा का दावा
कपरेट ने कहा कि परियोजना से हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। इसके अलावा दिल्ली सहित अन्य लाभार्थी राज्यों को पेयजल और बिजली उपलब्ध कराने में परियोजना की भूमिका होगी।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश के जल स्रोतों को देखते हुए प्रदेश को परियोजना से उचित आर्थिक लाभ मिलना चाहिए। कपरेट के अनुसार मुख्यमंत्री सुक्खू ने इसी दिशा में प्रदेश के हितों की मजबूती से पैरवी की है और समझौते के माध्यम से हिमाचल को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, आधिकारिक समझौते के अनुसार हिमाचल प्रदेश के लिए आवंटित पानी को दिल्ली और राजस्थान को देने के बदले परियोजना के हिमाचल वाले विद्युत घटक की लागत साझा करने पर सहमति बनी है। जल घटक की लागत का 90 प्रतिशत केंद्र सरकार केंद्रीय सहायता के रूप में वहन करेगी, जबकि शेष 10 प्रतिशत वित्तीय भार छह राज्यों द्वारा साझा किया जाएगा।
वाइल्ड फ्लावर हॉल का भी दिया उदाहरण
कपरेट ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व की सराहना करते हुए वाइल्ड फ्लावर हॉल का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि जिस तरह मुख्यमंत्री ने प्रदेश की संपत्तियों और अधिकारों को वापस हासिल करने के लिए संघर्ष किया, उसी तरह किशाऊ परियोजना में भी हिमाचल के हितों की रक्षा के लिए प्रयास किए गए हैं।
RDG और GST हिस्सेदारी को लेकर केंद्र पर निशाना
कांग्रेस प्रवक्ता ने प्रदेश की वित्तीय स्थिति को लेकर केंद्र सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने RDG अनुदान राशि बंद किए जाने और GST हिस्सेदारी में कमी जैसे मुद्दों का जिक्र करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश वित्तीय चुनौतियों का सामना कर रहा है।
कपरेट ने कहा कि इन परिस्थितियों के बावजूद राज्य सरकार प्रदेश के हितों की रक्षा के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र की नीतियों से उत्पन्न चुनौतियों का दोष राज्य सरकार पर मढ़ना तर्कसंगत नहीं है।
कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता ने किशाऊ परियोजना को हिमाचल प्रदेश के आर्थिक भविष्य, रोजगार सृजन और प्राकृतिक संसाधनों के बेहतर उपयोग से जुड़ा महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने दावा किया कि परियोजना से प्रदेश को दीर्घकालिक आर्थिक लाभ मिल सकते हैं और इसका प्रभाव आने वाली पीढ़ियों तक देखने को मिलेगा।
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