शिमला।
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा है कि किशाऊ बांध परियोजना को लेकर हिमाचल प्रदेश के हित में एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है, जिसके तहत राज्य को 211 मेगावाट मुफ्त बिजली मिलेगी।
उन्होंने दावा किया कि परियोजना के शुरू होने के पांच वर्ष बाद प्रदेश को हर साल करीब 600 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय भी प्राप्त होगी। मुख्यमंत्री ने इसे हिमाचल के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।
शुक्रवार को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय (एचपीयू) में विभिन्न विकास परियोजनाओं के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम के बाद पत्रकारों से बातचीत में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने प्रदेश के हितों को सर्वोपरि रखते हुए किशाऊ बांध परियोजना पर अपनी सहमति को मुफ्त बिजली से जोड़ा था।
उन्होंने कहा कि सरकार ने स्पष्ट कर दिया था कि यदि हिमाचल प्रदेश को परियोजना से मुफ्त बिजली नहीं मिलेगी तो राज्य इसकी सहमति नहीं देगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि किशाऊ बांध यमुना और टोंस नदी पर निर्मित किया जा रहा है, जिससे राजस्थान, दिल्ली और हरियाणा जैसे राज्यों को पेयजल और अन्य लाभ प्राप्त होंगे।
ऐसे में हिमाचल के अधिकारों की रक्षा करना आवश्यक था। उन्होंने कहा कि अब हुए समझौते के तहत प्रदेश को 211 मेगावाट मुफ्त बिजली मिलेगी, जिससे राज्य की आर्थिक स्थिति को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि यदि यह परियोजना किसी निजी कंपनी को दी जाती तो हिमाचल को केवल 12 प्रतिशत मुफ्त रॉयल्टी और एक प्रतिशत लाडा (लोकल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी) का लाभ मिलता, लेकिन वर्तमान समझौते से प्रदेश को कहीं अधिक फायदा होगा।
बीबीएमबी बकाया के लिए लड़ाई जारी
मुख्यमंत्री ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) के बकाया का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2011 में उच्चतम न्यायालय ने हिमाचल प्रदेश के पक्ष में फैसला दिया था, जिसके तहत हरियाणा को 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी के हिसाब से बकाया राशि का भुगतान करना है।
उन्होंने आरोप लगाया कि हरियाणा, पंजाब और राजस्थान इस मामले में लगातार अड़चनें पैदा कर रहे हैं। सुक्खू ने कहा कि प्रदेश सरकार ने इस कानूनी लड़ाई के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल को नियुक्त किया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि हरियाणा को सर्वोच्च न्यायालय में शपथपत्र देकर यह स्पष्ट करना होगा कि वह हिमाचल का बकाया हिस्सा देगा।
एचपीयू में करोड़ों की परियोजनाओं का लोकार्पण
इससे पहले मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में 10.09 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित मल्टी फैकल्टी भवन और कंप्यूटर आधारित परीक्षा (सीबीटी) लैब का उद्घाटन किया।
उन्होंने 8.25 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले नए अकादमिक ब्लॉक का शिलान्यास भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विश्वविद्यालय को मजबूत बनाने के लिए हर वर्ष लगभग 150 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दे रही है। इन प्रयासों से विश्वविद्यालय के आधारभूत ढांचे, डिजिटल सुविधाओं और शैक्षणिक गुणवत्ता को मजबूती मिलेगी।
ग्रीन हाइड्रोजन में शोध की अपार संभावनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार स्वच्छ और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रही है। इसी दिशा में सोलन जिले के नालागढ़ में प्रदेश की पहली ग्रीन हाइड्रोजन परियोजना स्थापित की जा रही है। उन्होंने विश्वविद्यालय के शोधार्थियों और वैज्ञानिकों से इस क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने का आह्वान किया।