आठ बार के विधायक और पूर्व मंत्री के फैसले से द्रंग विधानसभा क्षेत्र में नए राजनीतिक समीकरणों की चर्चा, पोते डॉ. कुलकीर्ति की भूमिका पर भी कयास तेज
हिमाचल प्रदेश की राजनीति के दिग्गज कांग्रेस नेता कौल सिंह ठाकुर ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। आठ बार विधायक, चार बार कैबिनेट मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और दो बार हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष रह चुके कौल सिंह ने अपने पांच दशक लंबे राजनीतिक सफर को विराम देने का निर्णय लिया है।
कौल सिंह ठाकुर ने यह घोषणा हिसार स्थित संत रामपाल के आश्रम में मुलाकात के दौरान की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में समय के साथ नई सोच और नए नेतृत्व को आगे आना चाहिए, इसी भावना से उन्होंने सक्रिय राजनीति छोड़ने का फैसला लिया है।
उन्होंने कहा, "मैं चार बार कैबिनेट मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष और दो बार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रहा हूं, लेकिन समय परिवर्तनशील है। अब नई पीढ़ी को आगे आकर द्रंग के विकास की यात्रा को आगे बढ़ाना चाहिए।"
इस दौरान कौल सिंह ठाकुर ने अपनी अस्वस्थ पत्नी के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना भी की। उन्होंने संत रामपाल से हिमाचल प्रदेश में भी सत्संग आयोजित करने का आग्रह किया, ताकि प्रदेश की जनता को आध्यात्मिक लाभ मिल सके।
द्रंग की राजनीति में नए समीकरणों की शुरुआत
कौल सिंह ठाकुर का द्रंग विधानसभा क्षेत्र की राजनीति में लंबे समय तक दबदबा रहा है। वर्ष 1977 में सक्रिय राजनीति में कदम रखने वाले कौल सिंह ने कई दशकों तक क्षेत्र और प्रदेश की राजनीति को प्रभावित किया।
उन्होंने 2022 के विधानसभा चुनाव को अपना अंतिम चुनाव बताया था, लेकिन उस चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। चुनावी हार के बाद कई मौकों पर उन्होंने अपनी राजनीतिक पीड़ा जाहिर की थी। उनका कहना था कि यदि जनता का समर्थन मिलता तो वह मुख्यमंत्री पद तक पहुंच सकते थे।
कौल सिंह ठाकुर ने कई बार पार्टी और सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर भी अपनी राय रखी थी। अब उनके संन्यास के फैसले को राजनीतिक जानकार द्रंग क्षेत्र में बड़े बदलाव के संकेत के रूप में देख रहे हैं।
क्या पोते डॉ. कुलकीर्ति के लिए तैयार हो रही राजनीतिक जमीन?
कौल सिंह ठाकुर के सक्रिय राजनीति से हटने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा उनके पोते डॉ. कुलकीर्ति को लेकर हो रही है। राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या कौल सिंह वर्ष 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले उनके लिए राजनीतिक जमीन तैयार कर रहे हैं।
चर्चाएं हैं कि डॉ. कुलकीर्ति किसी अन्य राजनीतिक दल, विशेषकर भाजपा, का रुख कर सकते हैं। हालांकि इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अगर कौल सिंह ठाकुर चुनावी मैदान से बाहर रहते हैं तो द्रंग विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस टिकट को लेकर मुकाबला और दिलचस्प हो सकता है।
2027 के टिकट की दौड़ में कई नाम
द्रंग विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस टिकट के संभावित दावेदारों में कई नाम सामने आ रहे हैं। इनमें अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप ठाकुर और पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष जोगेंद्र गुलेरिया सहित अन्य नेता शामिल हैं।
कौल सिंह ठाकुर के हटने के बाद कांग्रेस में नए नेतृत्व को लेकर गतिविधियां तेज होने की संभावना है।
कांग्रेस नेताओं ने फैसले पर जताई चिंता
कांग्रेस जिला महासचिव हेम सिंह ठाकुर ने कौल सिंह ठाकुर के संन्यास के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उनके बिना द्रंग की राजनीति अधूरी है। उन्होंने कौल सिंह से अपने निर्णय पर पुनर्विचार करने और सक्रिय राजनीति में बने रहने की अपील की है।
कौल सिंह ठाकुर का राजनीतिक सफर भले ही अब सक्रिय राजनीति में समाप्त हो रहा है, लेकिन हिमाचल की राजनीति में उनकी भूमिका और प्रभाव लंबे समय तक चर्चा में बने रहने की संभावना है।
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