बोह घाटी में बादल फटने के बाद 38 परिवार बेघर, स्पैड़ा और लाम गांव पर भी खतरा बरकरार; प्रशासन ने राहत एवं पुनर्वास कार्य तेज किए
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के शाहपुर उपमंडल की बोह घाटी में बादल फटने के बाद आई विनाशकारी आपदा ने कई गांवों की तस्वीर बदल दी है। केलंग नाले में आए उफान से गढ़गून और भंगार गांव पूरी तरह तबाह हो गए हैं, जबकि स्पैड़ा और लाम गांवों में भी भूस्खलन और जमीन दरकने का खतरा बना हुआ है।
प्रशासन ने एहतियात के तौर पर गढ़गून, भंगार और स्पैड़ा गांवों को खाली करवा दिया है। इन तीनों गांवों के 38 परिवार बेघर हो गए हैं। करीब 160 लोगों को बोह स्थित सरकारी वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में बनाए गए राहत शिविर में ठहराया गया है, जबकि कुछ परिवार अपने रिश्तेदारों के यहां शरण लिए हुए हैं।
गढ़गून गांव पूरी तरह मलबे में दबा
गढ़गून गांव में तबाही का मंजर बेहद भयावह है। गांव तक पहुंचने के लिए कई किलोमीटर पैदल सफर करना पड़ता है, लेकिन वहां पहुंचने पर अब घरों की जगह सिर्फ मलबा, बड़े पत्थर और उखड़े हुए पेड़ दिखाई देते हैं।
आपदा में गांव के 12 मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए। सरकारी प्राथमिक विद्यालय, आंगनबाड़ी केंद्र, खेत, पेयजल योजनाएं, बिजली के खंभे और गांव को जोड़ने वाला रास्ता भी नष्ट हो गया। कई पशुओं की भी मौत हो गई, जिससे ग्रामीणों की आजीविका पर गहरा असर पड़ा है।
भंगार और स्पैड़ा गांव भी प्रभावित
गढ़गून से सटे भंगार गांव में तीन परिवारों के मकान पूरी तरह रहने योग्य नहीं बचे हैं। घरों में रखा अनाज, जरूरी दस्तावेज और घरेलू सामान मलबे में दब गया।
वहीं स्पैड़ा गांव में करीब 12 मकान मलबे की चपेट में आ चुके हैं, जबकि 11 अन्य घरों को आंशिक नुकसान पहुंचा है। गांव के लगभग 27 परिवार फिलहाल राहत शिविरों और रिश्तेदारों के घरों में रहने को मजबूर हैं। लोगों में अब भी पहाड़ी से दोबारा मलबा आने का डर बना हुआ है।
लाम गांव में भी बढ़ा खतरा
आपदा का असर केवल तीन गांवों तक सीमित नहीं है। लाम गांव में भी जमीन लगातार दरक रही है। लगभग 60 घरों वाले इस गांव में 50 मकानों में दरारें आ चुकी हैं, जबकि छह मकान पूरी तरह असुरक्षित घोषित किए गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वे डर के साए में रातें गुजार रहे हैं।
डीसी ने किया दौरा, राहत कार्यों के दिए निर्देश
जिला उपायुक्त हेमराज बैरवा बुधवार शाम करीब पांच किलोमीटर पैदल चलकर गढ़गून गांव पहुंचे और प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि गांव में एक भी मकान सुरक्षित नहीं बचा है। प्रशासन ने सभी प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा दिया है और नुकसान का विस्तृत आकलन करने के निर्देश अधिकारियों को दिए गए हैं।
प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता
प्रशासन ने प्रत्येक प्रभावित परिवार को 50 हजार रुपये की तत्काल राहत देने की घोषणा की है। जिन परिवारों के मकान पूरी तरह ध्वस्त हुए हैं, उन्हें एक लाख रुपये तक की सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा, बेघर परिवारों को प्रति माह 5,000 रुपये किराया सहायता भी दी जाएगी।
मुख्यमंत्री ने भी प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास और हरसंभव सरकारी सहायता उपलब्ध कराने का भरोसा दिया है। राहत एवं बचाव कार्य लगातार जारी हैं और प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
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