शिमला।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बुधवार का दिन ऐतिहासिक रहा, जब देहरा की लोकप्रिय विधायक और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की धर्मपत्नी कमलेश ठाकुर का पहला संबोधन सदन में गूंजा। अपने 18 मिनट 33 सेकेंड के प्रभावी भाषण में उन्होंने वर्ष 2026-27 के बजट को 'आम आदमी का बजट' करार देते हुए विपक्ष पर तीखे मगर शालीन प्रहार किए।
कमलेश ठाकुर ने अपने संबोधन में केंद्र सरकार की नीतियों और प्रदेश को मिलने वाली सहायता पर चिंता जताते हुए एक अनूठा रूपक (Metaphor) इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा "आज हमारी तीन बहनें— एलपीजी (LPG), मनरेगा (MGNREGA) और आरडीजी (RDG) वेंटिलेटर पर हैं।"
उन्होंने गैस आपूर्ति की खराब स्थिति पर कटाक्ष करते हुए कहा कि हालात ऐसे हो गए हैं कि विधानसभा और हॉलिडे होम तक में चूल्हे पर खाना बनाने की नौबत आ गई है।
विधायक ने बजट की आलोचना करने वालों को जवाब देते हुए कहा कि बजट की किताब इसलिए भारी है क्योंकि इसमें ठोस तथ्य और जनकल्याण का संकल्प है। जैसे गीता को केवल एक किताब नहीं, बल्कि उसके सार से समझा जाता है, वैसे ही इस बजट की गहराई और उसके मानवीय सार को समझने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि इस योजना से केवल घरेलू महिलाओं को ही नहीं, बल्कि छोटे स्वरोजगार जैसे ब्यूटी पार्लर चलाने वाली महिलाओं और पशुपालकों को सीधा आर्थिक संबल मिलेगा। सीबीएसई (CBSE) पैटर्न को अपनाने के फैसले का समर्थन करते हुए उन्होंने कहा कि प्रदेश के बच्चों को राष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धा के लिए तैयार करना समय की मांग है।
उन्होंने अपने निर्वाचन क्षेत्र देहरा के कॉलेजों में विद्यार्थियों की संख्या कम होने पर चिंता जताई और इसमें सुधार की वकालत की। सरकार द्वारा अनाथ बच्चों को शोषण से बचाने और उन्हें 'चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट' का दर्जा देने के प्रयासों की जमकर सराहना की।
कमलेश ठाकुर के पहले भाषण की विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने मुक्तकंठ से सराहना की। वहीं, विपक्षी खेमे से भाजपा विधायक अनिल शर्मा ने भी उन्हें शुभकामनाएं देते हुए कहा कि एक राजनीतिक परिवार से होने का अनुभव उनके सार्वजनिक जीवन और विधायी कार्यों में स्पष्ट झलक रहा है।