शिमला।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा का बजट सत्र उस समय अखाड़े में तब्दील हो गया जब आजादी के इतिहास को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के दो दिग्गज नेता आमने-सामने आ गए। राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी और भाजपा विधायक सतपाल सत्ती के बीच हुई इस जुबानी जंग ने सदन का तापमान बढ़ा दिया।
"गांधी नहीं होते, तो देश आजाद न होता" — जगत सिंह नेगी
चर्चा के दौरान राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने कांग्रेस की विचारधारा का पक्ष रखते हुए महात्मा गांधी के योगदान को सर्वोपरि बताया। उन्होंने आक्रामक तेवर दिखाते हुए कहा गांधी के नेतृत्व के बिना भारत को दासता की बेड़ियों से मुक्त कराना असंभव था।
अंग्रेजों जैसी वैश्विक शक्ति को केवल गांधीवादी सिद्धांतों और अहिंसा के मार्ग से ही झुकाया जा सकता था। नेगी ने आरोप लगाया कि जो लोग आज सत्ता में हैं, उनका आजादी के आंदोलन में कोई योगदान नहीं रहा है।
"क्या सिर्फ चरखे से मिल गई आजादी?" — सतपाल सत्ती का तीखा पलटवार
नेगी के बयान पर ऊना के विधायक और पूर्व भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सत्ती ने कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने नेगी के तर्क को अन्य क्रांतिकारियों का अपमान करार दिया और पूछा "क्या उन हजारों युवाओं का बलिदान व्यर्थ था जिन्होंने फांसी के फंदे चूमे?
क्या देश को आजादी सिर्फ चरखा कातने से मिल गई थी?" सत्ती ने तर्क दिया कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस की आजाद हिंद फौज, सावरकर का संघर्ष और भगत सिंह-राजगुरु-सुखदेव की शहादत ने अंग्रेजों के मन में खौफ पैदा किया था। उन्होंने कहा कि आजादी को केवल एक व्यक्ति या एक परिवार तक सीमित करना उन लाखों अनाम शहीदों के साथ अन्याय है जिन्होंने देश के लिए अपना लहू बहाया।
इस बहस के चलते सदन में काफी देर तक हंगामा होता रहा। जहाँ कांग्रेस सदस्यों ने गांधी जी के समर्थन में नारेबाजी की, वहीं भाजपा सदस्यों ने 'वीर सावरकर' और 'भगत सिंह' के नारे लगाकर अपनी बात रखी। इस वाकयुद्ध ने एक बार फिर देश में 'अहिंसा बनाम सशस्त्र क्रांति' की पुरानी बहस को ताजा कर दिया है।