शिमला।
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधानसभा में बजट चर्चा के दौरान प्रदेश की स्वास्थ्य और ऊर्जा नीति में बड़े बदलावों की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार की शिकायतों और वित्तीय अनियमितताओं के चलते हिमकेयर योजना को बंद कर एक नई पारदर्शी बीमा प्रणाली लागू की जाएगी।
इसके साथ ही, बिजली बोर्ड पर बढ़ते घाटे को कम करने के लिए बिजली सब्सिडी को भी तर्कसंगत बनाया गया है।
मुख्यमंत्री ने सदन में बताया कि हिमकेयर योजना की ऑडिट रिपोर्ट में करीब ₹100 करोड़ की अनियमितताएं पाई गई हैं। मुख्यमंत्री ने इस मामले में विजिलेंस जांच (Vigilance Probe) के आदेश दे दिए हैं।
आरोप है कि कई निजी अस्पतालों ने मिलीभगत कर योजना के तहत गलत बिल बनाए और जनता के पैसे का दुरुपयोग किया। पुरानी योजना के स्थान पर सरकार अब एक नया बीमा-आधारित मॉडल (Insurance-based model) शुरू करेगी, ताकि भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो और जरूरतमंदों को ही इलाज का लाभ मिले।
बिजली बिलों पर दी जाने वाली सब्सिडी को लेकर भी सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब एक उपभोक्ता को केवल अधिकतम दो बिजली मीटरों पर ही सब्सिडी का लाभ मिलेगा।
क्यों लिया फैसला? सर्वे में सामने आया है कि कई रसूखदार और संपन्न परिवारों ने अपने घरों में 5 से 10 मीटर लगवा रखे हैं और हर मीटर पर मुफ्त बिजली (125/300 यूनिट) का लाभ ले रहे हैं।
तीसरे मीटर पर कमर्शियल दरें: यदि किसी के नाम पर दो से अधिक मीटर हैं, तो अतिरिक्त मीटरों पर बिजली की दरें सामान्य या कमर्शियल लागू होंगी।
टारगेटेड सब्सिडी: मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को राहत देना है, न कि उन लोगों को जो इसका गलत फायदा उठा रहे हैं।