मंडी।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के 14वें दीक्षांत समारोह में शनिवार को 643 विद्यार्थियों को विभिन्न पाठ्यक्रमों की डिग्रियां प्रदान की गईं। समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्वर्ण पदकों से भी सम्मानित किया गया।
वयून गोयल को मिला सर्वोच्च सम्मान
कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में बीटेक करने वाले वयून गोयल को प्रेजिडेंट ऑफ इंडिया गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया। वयून को एक अंतरराष्ट्रीय कंपनी में आकर्षक पैकेज भी मिला है। वहीं सुखवंश जैन को निदेशक स्वर्ण पदक प्रदान किया गया।
पीएचडी से लेकर एमबीए तक के विद्यार्थियों को मिली डिग्रियां
दीक्षांत समारोह में कुल 643 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें 60 पीएचडी, 13 एमए, 321 बीटेक, 77 एमटेक, 76 एमएससी और 45 एमबीए के विद्यार्थी शामिल रहे। इसके अलावा अन्य पाठ्यक्रमों के छात्रों को भी डिग्रियां प्रदान की गईं।
वेलस्पन समूह के चेयरमैन रहे मुख्य अतिथि
समारोह में वेलस्पन समूह के संस्थापक एवं चेयरमैन बीके गोयनका मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने मेधावी विद्यार्थियों को सम्मानित किया और बदलती दुनिया में नवाचार तथा तकनीक की भूमिका पर अपने विचार साझा किए।
सफलता और असफलता दोनों हैं सीखने का माध्यम : प्रो. बेहरा
संस्थान के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता और असफलता दोनों का अपना महत्व है। उन्होंने कहा कि सफलता हमें समाज को कुछ लौटाने की प्रेरणा देती है, जबकि असफलता हमें बेहतर बनने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने छात्रों को विज्ञान, तकनीक और भारतीय संस्कृति के समन्वय के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया।
सीखना कभी बंद न करें
प्रो. बेहरा ने कहा कि ज्ञान किसी को विरासत में नहीं मिलता, बल्कि जिज्ञासा, मेहनत और नए क्षेत्रों में कदम रखने के साहस से अर्जित किया जाता है। विद्यार्थियों को जीवनभर सीखते रहने की सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि बदलती दुनिया में निरंतर सीखना ही सफलता की कुंजी है।
उन्होंने कहा कि विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में जितनी भी बड़ी खोजें हुई हैं, उनके पीछे उन लोगों का योगदान रहा है जिन्होंने स्थापित सीमाओं से आगे बढ़कर जोखिम उठाने का साहस दिखाया।
प्रो. बेहरा ने कहा कि शिक्षक और छात्र एक ही सिक्के के दो पहलू हैं और दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से हिमालय की धरती से मिले संस्कार, धैर्य और ज्ञान को दुनिया तक पहुंचाने का आह्वान किया।
योग का अर्थ चेतना को ब्रह्मांड से जोड़ना
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की पूर्व संध्या पर प्रो. बेहरा ने योग के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि योग केवल शारीरिक अभ्यास नहीं, बल्कि व्यक्तिगत चेतना को ब्रह्मांडीय चेतना से जोड़ने का माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों से संतुलित, जागरूक और उद्देश्यपूर्ण जीवन जीने का संदेश दिया।