मंडी।
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी आने वाले वर्षों में रक्षा तकनीक, क्वांटम कंप्यूटिंग, भूकंप विज्ञान और जलवायु परिवर्तन जैसे रणनीतिक और महत्वपूर्ण क्षेत्रों में बड़े स्तर पर अनुसंधान करेगा।
संस्थान के निदेशक प्रो. लक्ष्मीधर बेहरा ने 14वें दीक्षांत समारोह के दौरान यह जानकारी देते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने क्वांटम तकनीक के विकास के लिए संस्थान को 200 करोड़ रुपये की परियोजना स्वीकृत की है।
रक्षा मंत्रालय के साथ चल रहे हैं कई शोध प्रोजेक्ट
प्रो. बेहरा ने बताया कि आईआईटी मंडी वर्तमान में रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर कई अत्याधुनिक अनुसंधान परियोजनाओं पर कार्य कर रहा है। इन परियोजनाओं का उद्देश्य देश की तकनीकी और रणनीतिक क्षमताओं को मजबूत करना है। संस्थान रक्षा क्षेत्र में उपयोगी नई तकनीकों के विकास पर विशेष ध्यान दे रहा है।
क्वांटम तकनीक बनेगी भविष्य की सबसे बड़ी ताकत
उन्होंने कहा कि क्वांटम तकनीक भविष्य की सबसे महत्वपूर्ण तकनीकों में शामिल है। आईआईटी मंडी कम लागत वाले उच्च क्षमता वाले कंप्यूटिंग सिस्टम विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है। वर्तमान में सुपर कंप्यूटर के निर्माण और संचालन पर भारी खर्च आता है, लेकिन क्वांटम तकनीक इस क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है।
जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन के लिए बनेगा विशेष केंद्र
आईआईटी मंडी जलवायु परिवर्तन और आपदा प्रबंधन से जुड़े शोध कार्यों को भी नई दिशा देने जा रहा है। इसके लिए विशेष अनुसंधान केंद्र स्थापित करने की योजना पर काम चल रहा है। हिमालयी राज्यों में बढ़ती प्राकृतिक आपदाओं को देखते हुए संस्थान इस क्षेत्र में वैज्ञानिक अध्ययन को प्राथमिकता दे रहा है।
भूकंप के प्रभावों को समझने के लिए विकसित होगा 3-डी पेंडुलम
प्रो. बेहरा ने बताया कि भूकंप के प्रभावों और भवनों की मजबूती का अध्ययन करने के लिए संस्थान थ्री-डी पेंडुलम विकसित कर रहा है। यह तकनीक शोधकर्ताओं को भूकंप के दौरान संरचनाओं पर पड़ने वाले प्रभावों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगी।
लोगों को भी सिखाए जाएंगे आपदा से बचाव के तरीके
संस्थान केवल शोध तक सीमित नहीं रहेगा बल्कि आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में जनजागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाएगा। पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से आम लोगों को आपदा के दौरान बचाव और सुरक्षा के उपाय सिखाने की योजना बनाई जा रही है।
नौकरी मांगने वाले नहीं, नौकरी देने वाले बनें युवा
प्रो. बेहरा ने कहा कि आईआईटी मंडी का लक्ष्य केवल इंजीनियर तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे युवा तैयार करना है जो रोजगार के अवसर पैदा करें। संस्थान चाहता है कि यहां से निकलने वाले कम से कम 10 प्रतिशत छात्र उद्यमी बनें और दूसरों को रोजगार दें।
उन्होंने बताया कि संस्थान ने हाल ही में करीब 100 करोड़ रुपये की बाह्य प्रायोजित अनुसंधान परियोजनाएं हासिल की हैं और विकसित भारत-2047 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए शिक्षा, अनुसंधान और नवाचार को नई दिशा दी जा रही है।
एआई से मिलेगा 'मेड इन इंडिया' को वैश्विक विस्तार : बीके गोयनका
दीक्षांत समारोह में वेलस्पन समूह के संस्थापक एवं चेयरमैन बीके गोयनका ने कहा कि बदलती दुनिया में केवल डिग्री और अंक पर्याप्त नहीं हैं। युवाओं को जोखिम लेने, नवाचार करने और तकनीक को प्रभावी ढंग से लागू करने की क्षमता विकसित करनी होगी।
उन्होंने कहा कि 'मेड इन इंडिया' को वैश्विक पहचान दिलाने में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और आधुनिक तकनीक की महत्वपूर्ण भूमिका रहने वाली है।
तकनीक बढ़ी, लेकिन मानवीय चुनौतियां अब भी बरकरार : प्रो. रंगन बनर्जी
आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंगन बनर्जी ने कहा कि एआई और तकनीक की तेज प्रगति के बावजूद भूख, गरीबी, स्वच्छ ऊर्जा, स्वास्थ्य और सुरक्षा जैसी चुनौतियां आज भी दुनिया के सामने मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में आज स्नातक हो रहे छात्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे और आने वाले दो दशकों में देश के विकास के प्रमुख भागीदार बनेंगे।