NDMA सदस्य डॉ. दिनेश कुमार असवाल रहे मुख्य अतिथि, विद्यार्थियों को राष्ट्र निर्माण और शोध में योगदान देने का संदेश
राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) हमीरपुर में शुक्रवार को 17वां दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। समारोह में विभिन्न स्नातक, स्नातकोत्तर और पीएचडी कार्यक्रमों के कुल 1,265 विद्यार्थियों को उपाधियां प्रदान की गईं। भारत सरकार के राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के सदस्य डॉ. दिनेश कुमार असवाल समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इस अवसर पर NIT हमीरपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष हर्षवर्धन नियोटिया, संस्थान के निदेशक प्रो. एच. एम. सूर्यवंशी, कुलसचिव एवं सीनेट सचिव डॉ. अर्चना संतोष नानोटी, अधिष्ठाता (शैक्षणिक) डॉ. आर. के. दत्ता, बोर्ड ऑफ गवर्नर्स और सीनेट के सदस्य, शिक्षक, विद्यार्थी और उनके अभिभावक मौजूद रहे।
गोल्ड मेडल पाकर खुश हुए मेधावी विद्यार्थी
समारोह में डायरेक्टर गोल्ड मेडल हासिल करने वाली छात्रा गौरीका ने अपनी खुशी जाहिर की। उन्होंने बताया कि यह मेडल ऑलराउंड प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थी को दिया जाता है। गौरीका के अनुसार, NIT हमीरपुर में उनका अनुभव बेहद अच्छा रहा। यहां उन्हें बहुत कुछ सीखने और कई प्रतिष्ठित लोगों से मिलने का अवसर मिला।
उन्होंने कहा कि इस उपलब्धि के पीछे उनकी कड़ी मेहनत है और गोल्ड मेडल मिलना उनके लिए गर्व और खुशी का क्षण है।
वहीं, बीटेक की पढ़ाई पूरी करने वाले छात्र नयन यादव ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2026 में बीटेक की डिग्री पूरी की है। बेहतर प्रदर्शन के लिए उन्हें समारोह में गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि चार साल की मेहनत का फल उन्हें आज मिला है। NIT हमीरपुर में बिताया गया उनका सफर अच्छा रहा और इस दौरान उन्हें काफी कुछ सीखने को मिला।
NDMA सदस्य ने आपदा प्रबंधन पर की चर्चा
समारोह के मुख्य अतिथि डॉ. दिनेश कुमार असवाल ने राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की कार्यप्रणाली और देश में आपदा प्रबंधन से जुड़े प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि NDMA प्रधानमंत्री के अधीन कार्य करता है, जबकि राज्यों में भी आपदा प्रबंधन प्राधिकरण गठित हैं, जिनकी अध्यक्षता संबंधित राज्यों के मुख्यमंत्री करते हैं।
उन्होंने कहा कि हिमालयी क्षेत्र भूस्खलन, ग्लेशियर पिघलने और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के लिहाज से संवेदनशील है। ऐसे में आपदाओं के प्रभाव को कम करने के लिए वैज्ञानिक अध्ययन, निगरानी और बेहतर तैयारी जरूरी है।
आपदा की स्थिति में सहायता की व्यवस्था
डॉ. असवाल ने बताया कि आपदा की स्थिति में राज्य सरकारें आवश्यक सहायता के लिए प्रस्ताव भेजती हैं। जहां राज्य के संसाधन पर्याप्त नहीं होते, वहां केंद्र सरकार और संबंधित एजेंसियों के माध्यम से सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। उन्होंने राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (NDRF) और राष्ट्रीय आपदा शमन कोष (NDMF) का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि भूस्खलन जैसी घटनाओं को लेकर विभिन्न कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं। ग्लेशियरों की निगरानी के लिए सेंसर तकनीक का इस्तेमाल भी किया जा रहा है, जिससे उनकी ऊंचाई में होने वाले बदलावों को मापने में मदद मिलती है।
राष्ट्र निर्माण और शोध में योगदान देने का संदेश
डॉ. दिनेश कुमार असवाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में तेजी से बदलाव हो रहे हैं और नई पीढ़ी के लिए तकनीक एवं डेटा तक पहुंच बेहद जरूरी है।
उन्होंने बताया कि भविष्य में शोध काफी हद तक डेटाबेस और उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित होगा। इसलिए विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को गुणवत्तापूर्ण डेटा उपलब्ध कराया जाना चाहिए, ताकि वे बेहतर और तेजी से अनुसंधान कर सकें।
NIT हमीरपुर का 17वां दीक्षांत समारोह विद्यार्थियों के लिए उपलब्धियों, मेहनत और नए सपनों की शुरुआत का यादगार अवसर बना।
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