शिमला।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का दूसरा चरण आज हंगामे के साथ शुरू हुआ। सत्र की शुरुआत में ही मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने भ्रष्टाचार पर कड़ा प्रहार करते हुए एक बड़ा ऐलान किया है।
मुख्यमंत्री ने सदन में स्पष्ट किया कि प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत ऐसे अधिकारी जिनकी निष्ठा 'संदिग्ध' है या जो भ्रष्टाचार के आरोपों में घिरे हैं, उन्हें तुरंत प्रभाव से महत्वपूर्ण पदों से हटाया जाएगा।
ऊना में तहसीलदार के रिश्वत कांड का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री ने सदन में घोषणा की कि सरकार प्रशासन को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा संदिग्ध रिकॉर्ड वाले अधिकारियों की पहचान कर ली गई है और उन्हें फील्ड ड्यूटी से हटाया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार के किसी भी मामले में संलिप्त पाए जाने वाले व्यक्ति को, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो, बख्शा नहीं जाएगा। सीएम ने संकेत दिया कि प्रदेश की वित्तीय सेहत सुधारने के लिए मंत्रियों और विधायकों के भत्तों में भी कटौती के कड़े फैसले लिए जा सकते हैं।
विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया के अनुसार, यह सत्र 2 अप्रैल तक चलेगा। मुख्यमंत्री, जिनके पास वित्त विभाग भी है, 21 मार्च को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए अपना चौथा बजट पेश करेंगे। इस बजट से प्रदेश के कर्मचारियों को महंगाई भत्ते (DA) और बागवानों को नई सब्सिडी योजनाओं की काफी उम्मीदें हैं।
जहाँ एक ओर मुख्यमंत्री ने कड़े सुधारों की बात की, वहीं भाजपा विधायक दल ने सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सरकार पर जनहित की अनदेखी और केवल बयानबाजी करने का आरोप लगाया। विपक्ष ने 'आर्थिक तंगहाली' और 'रुके हुए विकास कार्यों' को लेकर सदन के बाहर और भीतर जमकर नारेबाजी की।