शिमला
हिमाचल प्रदेश में रविवार को मौसम के मिजाज ने ऐसी करवट बदली कि लोग गर्मी भूलकर दोबारा ठंड का एहसास करने लगे। जहाँ एक ओर प्रदेश के कई जिलों में हुई झमाझम बारिश ने तपती गर्मी से बड़ी राहत दिलाई है, वहीं दूसरी ओर बेमौसमी बरसात और तेज अंधड़ ने किसानों की चिंता बढ़ा दी है। विशेषकर गेहूं की फसल और पशुओं के चारे (तूड़ी) पर बर्बादी का संकट मंडराने लगा है।
शिमला और सोलन में लौटी ठंड, सुबह ही छा गया अंधेरा
राजधानी शिमला में रविवार सुबह से ही घने काले बादल छाए रहे, जिसके बाद हुई जोरदार बारिश ने तापमान को काफी नीचे गिरा दिया है। आलम यह है कि मई के महीने में भी लोग गर्म कपड़े निकालने पर मजबूर हो गए हैं।
वहीं, सोलन में सुबह करीब 8:00 बजे अचानक अंधेरा छा गया और तेज तूफान के साथ बारिश शुरू हो गई। मौसम विभाग ने आगामी दो दिनों तक जिले में मौसम खराब रहने और भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
ऊना में अंधड़ का तांडव: उड़ गई तिरपाल, भीग गई तूड़ी
ऊना की उपतहसील जोल और आसपास के क्षेत्रों में सुबह सवा छह बजे आए भीषण अंधड़ ने भारी नुकसान पहुँचाया है। तेज हवाओं के कारण कई जगहों पर पेड़ों की टहनियां गिर गईं। किसानों ने खुले खेतों में रखी तूड़ी को बचाने के लिए जो तिरपाल लगाए थे, वे हवा में उड़ गए।
इससे पशुओं का चारा पूरी तरह भीग गया है। किसानों का कहना है कि भीगी हुई तूड़ी अब खराब होने की कगार पर है, जिससे उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान होगा।
मंडी में गेहूं की फसल बर्बाद, मुआवजे की गुहार
मंडी जिले की लडभड़ोल तहसील में बेमौसमी बारिश आफत बनकर बरसी है। यहाँ खेतों में पानी जमा होने से गेहूं की फसलें खराब होने लगी हैं। स्थानीय किसान विजय, रवि चौहान और राजेश ठाकुर ने बताया कि उनकी महीनों की मेहनत बर्बाद हो चुकी है। किसानों ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि नुकसान का तुरंत आकलन करवाकर उचित मुआवजा दिया जाए।
कृषि विभाग की सलाह और बीमा का प्रावधान
नुकसान की खबरों के बीच कृषि विभाग चौंतड़ा की विशेषज्ञ सोनम कुमारी ने बताया कि विभाग को फिलहाल नुकसान की कोई आधिकारिक रिपोर्ट नहीं मिली है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत अपनी फसलों का बीमा करवाया है, उन्हें मुआवजे का लाभ मिल सकेगा।
प्रशासन ने किसानों को सतर्क रहने और कटी हुई फसल को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाने की सलाह दी है।