शिमला।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के छठे दिन की कार्यवाही आज काफी गहमागहमी भरी रही। प्रश्नकाल के दौरान जहां विपक्ष ने प्रदेश में रसोई गैस (LPG) सिलिंडरों की कमी और नई वितरण नीति को लेकर सरकार को घेरा, वहीं सत्ता पक्ष ने इन आरोपों का जवाब देते हुए व्यवस्था परिवर्तन की बात कही।
विपक्ष का हमला: 'जनता परेशान, सिलिंडर का अकाल'
विपक्ष ने सदन में मुद्दा उठाया कि हाल के दिनों में शादी-ब्याह और सामाजिक आयोजनों के लिए सिलिंडर प्राप्त करने की प्रक्रिया को बेहद जटिल बना दिया गया है। विधायकों ने आरोप लगाया कि "कमेटी से मंजूरी" के नए नियमों के कारण आम जनता को भारी असुविधा हो रही है।
विपक्ष का दावा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सिलिंडरों की आपूर्ति बाधित है, जिससे लोग चूल्हा जलाने को मजबूर हैं।
सरकार का जवाब: 'कालाबाजारी रोकने के लिए कड़े नियम जरूरी'
विपक्ष के सवालों का जवाब देते हुए खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसी को परेशान करना नहीं, बल्कि घरेलू सिलिंडरों के व्यावसायिक दुरुपयोग को रोकना है।
उन्होंने कहा बड़े आयोजनों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी न हो, इसलिए कमर्शियल सिलिंडरों के लिए आवेदन अनिवार्य किया गया है। कमेटी द्वारा मंजूरी की प्रक्रिया से बिचौलियों और कालाबाजारी करने वालों पर लगाम लगेगी। सरकार ने दावा किया कि प्रदेश में गैस का पर्याप्त स्टॉक है और केवल नियमन (Regulation) को सख्त किया गया है।
सदन में उठे अन्य महत्वपूर्ण मुद्दे
सिलिंडर के मुद्दे के अलावा, आज बजट सत्र के छठे दिन निम्नलिखित विषयों पर भी चर्चा हुई। लोक निर्माण विभाग से प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में लंबित सड़क परियोजनाओं पर जवाब मांगा गया।
स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पदों और अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं की कमी पर विधायकों ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किए। बजट में घोषित एमएसपी (MSP) के कार्यान्वयन की समयसीमा को लेकर भी सवाल पूछे गए।
कार्यवाही का निष्कर्ष
छठे दिन की कार्यवाही में यह स्पष्ट दिखा कि सरकार बजट घोषणाओं को लागू करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहरा रही है, जबकि विपक्ष कार्यान्वयन की कमियों को उजागर करने में जुटा है।