शिमला।
राजधानी शिमला के नव बहार क्षेत्र में एक युवक के साथ हुई लूटपाट और फिरौती की कोशिश के मामले में पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों ने अपराध को अंजाम देने के लिए जिस गाड़ी का इस्तेमाल किया, उसे इस कदर 'मॉडिफाई' किया गया था कि उसके असली मालिक का पता लगाना नामुमकिन लगे।
क्या था मामला?
घटना 20 मार्च 2026 की है, जब नव बहार निवासी आर्यन चौहान ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत के अनुसार, तारापुर सड़क पर एक गाड़ी (HP 58A-1965) से तीन संदिग्ध व्यक्ति उतरे और फिरौती व लूटपाट के इरादे से उन पर हमला कर दिया।
इस शिकायत के आधार पर थाना में BNS की विभिन्न धाराओं (311, 109, 126(2), 351, 115(2), 3(5)) और आर्म्स एक्ट (25, 27) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
पहचान छिपाने की साज़िश: इंजन और चेसिस नंबर तक मिटाए
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया और सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगाली। जांच के दौरान मशोबरा से संदिग्ध गाड़ी बरामद की गई। जब पुलिस ने गाड़ी की जांच की, तो वे भी दंग रह गए।
आरोपियों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए गाड़ी की नंबर प्लेट फर्जी लगा रखी थी। गाड़ी के इंजन नंबर और चेसिस नंबर को पूरी तरह घिस कर मिटा दिया था। पहचान से जुड़े हर एक भौतिक निशान को नष्ट करने का प्रयास किया गया था।
तकनीकी साक्ष्यों से बेनकाब हुए आरोपी
आरोपियों द्वारा साक्ष्य मिटाने की पूरी कोशिश के बावजूद, शिमला पुलिस ने डिजिटल और तकनीकी विश्लेषण (Technical Analysis) का सहारा लिया। गहन जांच के बाद आज (23 मार्च) दो मुख्य आरोपियों को दबोच लिया गया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान:
चरणजीत सिंह (48 वर्ष): निवासी करोडी मल बिल्डिंग, संजौली, शिमला।
ताशी नेगी (45 वर्ष): निवासी नारकंडा, तहसील कुमारसैन, जिला शिमला।
पुलिस की आगामी कार्रवाई
शिमला पुलिस के अनुसार, इस गिरोह के अन्य सदस्यों और उनके पिछले आपराधिक रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। आरोपियों को जल्द ही अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड ली जाएगी, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वे और किन-किन वारदातों में शामिल रहे हैं।