मंत्री राजेश धर्माणी बोले- प्राकृतिक आपदाओं से नुकसान रोकने और पर्यावरण संरक्षण के लिए नया ब्लूप्रिंट तैयार, हाईवे किनारे निर्माण भी होगा नियंत्रित
हिमाचल प्रदेश सरकार ने प्राकृतिक सौंदर्य को संरक्षित रखने, अनियंत्रित निर्माण पर रोक लगाने और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले जान-माल के नुकसान को कम करने के लिए व्यापक नीति तैयार की है। सरकार का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ भविष्य में सुरक्षित और सुनियोजित विकास सुनिश्चित करना है।
नगर एवं ग्राम नियोजन (TCP), आवास, व्यावसायिक एवं औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री राजेश धर्माणी ने बताया कि प्रदेश में बिना मास्टर प्लान के हो रहे निर्माण पर प्रभावी नियंत्रण के लिए सख्त कदम उठाए जा रहे हैं।
जाखू हिल्स को बनाया जाएगा संरक्षित क्षेत्र
राजेश धर्माणी ने कहा कि शिमला के संवेदनशील जाखू हिल्स क्षेत्र को विशेष संरक्षित क्षेत्र घोषित करने की तैयारी है। इसमें संजौली से आईजीएमसी रोड, रानी झांसी पार्क, मेट्रोपोल और ओकओवर सहित आसपास का पूरा पहाड़ी क्षेत्र शामिल होगा।
उन्होंने कहा कि इस कदम का उद्देश्य शिमला की प्राकृतिक पहचान और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखना है।
बिना मास्टर प्लान निर्माण पर लगेगी रोक
सरकार पूरे प्रदेश में बिना मास्टर प्लान के होने वाले बेतरतीब निर्माण पर रोक लगाएगी। मंत्री ने कहा कि अनियंत्रित निर्माण न केवल पर्यावरण के लिए खतरा है बल्कि भविष्य में प्राकृतिक आपदाओं का जोखिम भी बढ़ाता है।
हाईवे और फोरलेन के किनारे बनेगा प्लानिंग एरिया
सरकार ने राष्ट्रीय राजमार्गों और फोरलेन सड़कों के आसपास 50 से 100 मीटर तक के क्षेत्र को 'प्लानिंग एरिया' घोषित करने का प्रस्ताव तैयार किया है।
इन क्षेत्रों में निर्माण कार्य नियमानुसार और नियंत्रित तरीके से ही किए जा सकेंगे।
ग्रामीण सड़कों के किनारे रहेगा नो कंस्ट्रक्शन जोन
नई नीति के तहत ग्रामीण सड़कों के किनारे कम से कम एक मीटर क्षेत्र को 'नो कंस्ट्रक्शन जोन' रखा जाएगा।
मंत्री ने कहा कि सड़क से सटाकर मकान बनने के कारण दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ता है और सीवरेज, पेयजल, बिजली तथा ड्रेनेज जैसी मूलभूत सुविधाओं के विकास में भी बाधा आती है।
राजेश धर्माणी ने कहा कि हर वर्ष मानसून में होने वाले भारी नुकसान का बड़ा कारण जलधाराओं, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों, पुरानी डंपिंग साइटों और फ्लड जोन में किया गया निर्माण है।
सरकार ऐसे सभी संवेदनशील क्षेत्रों को 'नो कंस्ट्रक्शन जोन' घोषित करेगी, ताकि भविष्य में आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।
हर शहर में विकसित होंगे अर्बन फॉरेस्ट
पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए सरकार प्रत्येक शहर में अर्बन फॉरेस्ट (Urban Forest) विकसित करने हेतु उपयुक्त स्थान चिन्हित कर रही है।
इससे हरित क्षेत्र बढ़ेंगे और शहरी क्षेत्रों का पर्यावरणीय संतुलन बेहतर होगा।
ग्राम पंचायतों की होगी अहम भूमिका
सरकार ने इस अभियान में ग्राम पंचायतों को भी शामिल करने का निर्णय लिया है।
कैबिनेट चर्चा के बाद सभी पंचायतों को विशेष एजेंडा भेजा जाएगा, ताकि वे अपने क्षेत्रों में आपदा संभावित और संवेदनशील स्थानों की पहचान कर उन्हें 'नो कंस्ट्रक्शन जोन' घोषित करने का प्रस्ताव पारित कर सकें।
प्रभावित भू-स्वामियों को मिलेगा विकल्प
मंत्री राजेश धर्माणी ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य विकास कार्यों को रोकना नहीं, बल्कि लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
उन्होंने कहा कि जिन भू-स्वामियों की जमीन 'नो कंस्ट्रक्शन जोन' में आएगी, उन्हें सरकार सर्कल रेट के अनुसार जमीन खरीदने का पारदर्शी विकल्प उपलब्ध कराएगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य न्यूनतम आवश्यक नियमों के साथ हिमाचल को सुरक्षित, सुंदर और सुव्यवस्थित राज्य के रूप में विकसित करना है।
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