केंद्रीय विश्वविद्यालय की यूडीसी भर्ती मामले में अदालत ने संशोधित चयन सूची को सही ठहराया, एससी अभ्यर्थी की याचिका खारिज।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश की यूडीसी (अपर डिविजन क्लर्क) भर्ती से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई पद पूरी तरह अनारक्षित श्रेणी के लिए विज्ञापित है, तो उस पर केवल सामान्य श्रेणी का योग्यता मानदंड और कट-ऑफ लागू होगा।
न्यायमूर्ति अजय मोहन गोयल की अदालत ने कहा कि अनारक्षित पदों पर एससी, एसटी या अन्य आरक्षित वर्गों के लिए निर्धारित कम न्यूनतम अंकों का लाभ नहीं दिया जा सकता। कोर्ट ने विश्वविद्यालय द्वारा जारी संशोधित चयन सूची को सही ठहराते हुए याचिका खारिज कर दी।
यूडीसी के दोनों पद थे अनारक्षित
मामला केंद्रीय विश्वविद्यालय हिमाचल प्रदेश की वर्ष 2017 में गैर-शिक्षण पदों के लिए निकाली गई भर्ती से जुड़ा है। इस भर्ती में अपर डिविजन क्लर्क (यूडीसी) के दो पद विज्ञापित किए गए थे, जो पूरी तरह अनारक्षित श्रेणी के थे।
एससी श्रेणी के एक अभ्यर्थी ने इन पदों के लिए आवेदन किया था। मई 2018 में जारी पहली चयन सूची में उनका नाम शामिल था, लेकिन अगले ही दिन विश्वविद्यालय ने प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए सूची को स्थगित कर दिया।
इसके बाद 24 मई 2018 को जारी संशोधित चयन सूची में अभ्यर्थी का नाम हटा दिया गया और यूडीसी पद पर किसी भी उम्मीदवार का चयन नहीं किया गया।
विश्वविद्यालय ने गलती सुधारकर जारी की थी संशोधित सूची
विश्वविद्यालय ने अदालत में बताया कि पहली सूची में अभ्यर्थी का नाम गलती से शामिल हो गया था। सभी उम्मीदवारों की पात्रता का दोबारा मूल्यांकन किया गया और गलती सामने आने के बाद संशोधित सूची जारी की गई।
अदालत ने विश्वविद्यालय के इस तर्क को स्वीकार करते हुए कहा कि संशोधित चयन सूची में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है।
कट-ऑफ को लेकर कोर्ट ने दी स्पष्ट व्याख्या
अदालत के अनुसार, लिखित परीक्षा में सामान्य ज्ञान विषय के लिए:
निर्धारित किए गए थे।
हालांकि, कोर्ट ने कहा कि ये अलग-अलग कट-ऑफ इसलिए तय किए गए थे क्योंकि भर्ती विज्ञापन में अन्य पद आरक्षित श्रेणियों के लिए भी शामिल थे।
यूडीसी के दोनों पद केवल अनारक्षित श्रेणी के थे, इसलिए सभी अभ्यर्थियों के लिए 8 अंक का मानदंड लागू होगा।
आरक्षित वर्ग की छूट का लाभ नहीं दिया जा सकता
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के उस तर्क को खारिज कर दिया, जिसमें एससी श्रेणी के आधार पर 6 अंकों की छूट देने की मांग की गई थी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि आरक्षण का लाभ केवल उन्हीं पदों पर दिया जा सकता है, जो संबंधित आरक्षित श्रेणी के लिए निर्धारित हों। अनारक्षित पदों पर चयन के लिए सामान्य श्रेणी के नियम ही लागू होंगे।
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