मंत्रालय का दावा- कच्चे तेल की कीमत 135 डॉलर प्रति बैरल पहुंचने पर भी पेट्रोल 125 रुपये तक जाने से बचा; E-20 से करीब 30 रुपये प्रति लीटर की बचत
केंद्र सरकार ने संसद में पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण (E-20) की नीति का जोरदार बचाव किया है। सरकार ने कहा कि यदि देश में एथनॉल मिश्रण कार्यक्रम लागू नहीं किया गया होता तो मध्य-पूर्व संकट के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी का असर भारत में पेट्रोल के दामों पर भी पड़ता।
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, यदि कच्चे तेल की कीमत 135 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचती तो देश में पेट्रोल की कीमत करीब 125 रुपये प्रति लीटर तक जा सकती थी। मंत्रालय का दावा है कि घरेलू स्तर पर तय कीमतों पर खरीदे गए एथनॉल के कारण उपभोक्ताओं को राहत मिली और करीब 30 रुपये प्रति लीटर तक की बचत हुई।
एथनॉल मिश्रण से अंतरराष्ट्रीय कीमतों का असर सीमित
सरकार ने बताया कि भारत में वर्तमान में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रित पेट्रोल (E-20) का इस्तेमाल किया जा रहा है। चूंकि एथनॉल का उत्पादन देश के भीतर होता है और इसकी कीमत पहले से निर्धारित रहती है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का पेट्रोल कीमतों पर प्रभाव सीमित रहता है।
मंत्रालय के अनुसार, इसी नीति के कारण उपभोक्ताओं को करीब 94.77 रुपये प्रति लीटर की दर से पेट्रोल उपलब्ध कराने में मदद मिली।
गरीबों के अनाज इस्तेमाल के आरोपों को सरकार ने नकारा
सरकार ने उन आरोपों को भी खारिज किया है, जिनमें कहा गया था कि एथनॉल उत्पादन के लिए गरीबों के हिस्से का अनाज या भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) का सब्सिडी वाला चावल इस्तेमाल किया जा रहा है।
पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि एथनॉल कार्यक्रम के लिए खाद्यान्न की आपूर्ति तय नियमों और निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाती है।
सरकार के अनुसार, मध्य-पूर्व में 28 फरवरी 2026 से शुरू हुए संकट के बाद करीब 75 दिनों तक पेट्रोल और डीजल की कीमतों को स्थिर रखा गया। इसके बाद मई में दोनों ईंधनों की कीमतों में 7.50 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई।
वर्तमान में दिल्ली में E-20 पेट्रोल की कीमत करीब 102.12 रुपये प्रति लीटर बताई गई है, जबकि सरकार ने बिना एथनॉल मिश्रण वाले पेट्रोल की अनुमानित कीमत 169 रुपये प्रति लीटर होने का दावा किया है।
E-20 से माइलेज में 2 से 6 प्रतिशत तक कमी संभव
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने लोकसभा में बताया कि E-10 ईंधन के लिए तैयार किए गए BS-III, BS-IV और BS-VI वाहनों में E-20 पेट्रोल इस्तेमाल करने पर ईंधन दक्षता यानी माइलेज में लगभग 2 से 6 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।
इससे पहले पेट्रोलियम मंत्रालय ने माइलेज में कमी का अनुमान 3 से 5 प्रतिशत के बीच बताया था।
वैज्ञानिक परीक्षण के बाद लागू हुई नीति
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि E-20 पेट्रोल को लागू करने से पहले ऑटोमोबाइल कंपनियों और तेल विपणन कंपनियों के साथ विस्तृत चर्चा की गई थी।
उन्होंने बताया कि इंजन की क्षमता, वाहन के पुर्जों की अनुकूलता और प्रदूषण स्तर की जांच के बाद ही इस नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू किया गया।
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