शिमला: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने प्रदेश में आउटसोर्स भर्तियों को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए नई नियुक्तियों पर रोक लगाने के आदेश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बी.सी. नेगी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया है कि सरकार और उसके अधीन आने वाले उपक्रमों में कोई भी नियुक्ति भर्ती एवं पदोन्नति नियमों के विपरीत नहीं की जा सकती।
अदालत ने कहा कि नियमित भर्ती प्रक्रिया को दरकिनार कर आउटसोर्सिंग के माध्यम से बड़े पैमाने पर नियुक्तियां करना मनमाना, भेदभावपूर्ण और बेरोजगार युवाओं के अधिकारों का उल्लंघन है। कोर्ट ने इस व्यवस्था पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि इससे समान अवसर के सिद्धांत पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
सुनवाई के दौरान यह तथ्य सामने आया कि स्वास्थ्य विभाग में पहले कर्मचारियों की नियुक्ति आउटसोर्स आधार पर की जाती है और बाद में उन्हें रोगी कल्याण समितियों में समाहित कर दिया जाता है। अदालत ने इस प्रक्रिया को गंभीरता से लिया और सरकार से जवाब तलब किया।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि प्रदेश में कार्यरत सभी आउटसोर्स कर्मचारियों का समग्र और अद्यतन डेटा उपलब्ध नहीं है। हालांकि उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब 17,114 आउटसोर्स कर्मचारी विभिन्न सरकारी संस्थानों और विभागों में कार्यरत हैं।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को निर्धारित की है। तब तक प्रदेश में आउटसोर्स भर्तियों को लेकर सरकार की नीति और प्रक्रिया न्यायिक समीक्षा के दायरे में रहेगी।