शिमला I
हिमाचल प्रदेश में लोक निर्माण विभाग (PWD) के सर्वोच्च पद पर हुई एक ताजा नियुक्ति ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। राज्य सरकार ने सेवा विस्तार (Extension) और पुनर्रोजगार पर अपनी ही लगाई रोक के आदेशों को दरकिनार करते हुए पीडब्ल्यूडी के इंजीनियर-इन-चीफ नरेंद्र पाल सिंह को छह महीने का सेवा विस्तार दे दिया है।
जिला हमीरपुर से संबंध रखने वाले नरेंद्र पाल सिंह पीडब्ल्यूडी विभाग के इंजीनियर-इन-चीफ पद पर तैनात हैं। कार्मिक विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, उन्हें 1 मई 2026 से 31 अक्टूबर 2026 तक की अवधि के लिए विस्तार दिया गया है।
वित्त विभाग के निर्देशों के तहत, विस्तार अवधि के दौरान उन्हें कोई वार्षिक वेतन वृद्धि (Increment) नहीं दी जाएगी और वह पूर्व निर्धारित वेतन पर ही कार्य करेंगे।
यह मामला इसलिए चर्चा और विवादों में है क्योंकि महज तीन सप्ताह पहले ही सरकार ने कड़ा रुख अपनाया था राज्य सरकार ने अधिसूचना जारी कर प्रदेश में अधिकारियों के सेवा विस्तार और पुनर्रोजगार पर पूर्ण रोक लगा दी थी।
अभी इस आदेश की स्याही सूखी भी नहीं थी कि सरकार ने महज 23 दिन के भीतर अपने ही फैसले के खिलाफ जाकर PWD इंजीनियर को एक्सटेंशन दे दिया। सरकार ने इस आदेश को 'जनहित' (Public Interest) में लिया गया निर्णय बताया है।
सरकार के इस फैसले से सचिवालय में खासी चर्चा है। एक ओर जहां सरकार वित्तीय संकट और बेरोजगार युवाओं को मौका देने की बात कहकर एक्सटेंशन पर रोक लगाती है, वहीं दूसरी ओर चहेते अधिकारियों को पद पर बनाए रखने के लिए 'जनहित' का सहारा लिया जा रहा है।
क्या विभाग में इस पद के लिए कोई अन्य काबिल अधिकारी नहीं था? क्या यह निर्णय प्रदेश में लागू आदर्श चुनाव आचार संहिता के प्रोटोकॉल का उल्लंघन है?क्या आने वाले समय में अन्य अधिकारी भी इसी तर्ज पर सेवा विस्तार की मांग करेंगे?
फिलहाल, नरेंद्र पाल सिंह अब 31 अक्टूबर 2026 को पद से सेवानिवृत्त होंगे। सरकार के इस 'दोहरे मापदंड' को लेकर विपक्ष को भी हमलावर होने का एक बड़ा मौका मिल गया है।