शिमला I
हिमाचल प्रदेश में अब किसी को डराने या धमकाने (Criminal Intimidation) का अपराध करना बेहद महंगा पड़ सकता है। प्रदेश सरकार ने राज्य में कानून व्यवस्था को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एक बड़ा कदम उठाते हुए धमकी देने से जुड़े अपराधों को संज्ञेय (Cognizable) और गैर-जमानती (Non-Bailable) घोषित कर दिया है।
बिना वारंट गिरफ्तारी का अधिकार
गृह विभाग द्वारा जारी नई अधिसूचना के अनुसार, भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की धारा 351 के तहत आने वाले अपराध अब और अधिक गंभीर श्रेणी में रखे गए हैं। इस बदलाव का सबसे बड़ा असर यह होगा कि अब पुलिस को ऐसे मामलों में किसी आरोपी को गिरफ्तार करने के लिए अदालत से वारंट लेने की आवश्यकता नहीं होगी।
पुलिस मौके पर ही सख्त कार्रवाई करते हुए आरोपी को हिरासत में ले सकेगी।
IPC की जगह अब BNS का प्रावधान
अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) कमलेश कुमार पंत द्वारा जारी अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि पहले जो मामले भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 506 के तहत दर्ज किए जाते थे, वे अब नए कानून 'भारतीय न्याय संहिता' की धारा 351 के तहत कवर होंगे। सरकार ने इसे तत्काल प्रभाव से पूरे प्रदेश में लागू कर दिया है।
क्यों लिया गया यह फैसला?
अक्सर देखा जाता है कि आपसी रंजिश या विवादों में लोग एक-दूसरे को जान से मारने या नुकसान पहुँचाने की धमकियां देते हैं। पहले यह अपराध जमानती होने के कारण आरोपी आसानी से छूट जाते थे और पीड़ित डरा महसूस करता था। अब इन अपराधों को गैर-जमानती बनाने से अपराधियों में कानून का खौफ बढ़ेगा और पीड़ित पक्ष को अधिक सुरक्षा मिल सकेकी।