13 साल अवधि वाली सरकारी प्रतिभूतियां जारी होंगी, आरबीआई के जरिए ई-नीलामी से जुटाई जाएगी धनराशि
हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में चल रही विकास परियोजनाओं और आधारभूत ढांचा निर्माण कार्यों को गति देने के लिए बाजार से 700 करोड़ रुपये का ऋण लेने का निर्णय लिया है।
प्रदेश के वित्त विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार यह ऋण 13 वर्ष अवधि वाली सरकारी प्रतिभूतियां (Government Securities) जारी कर जुटाएगी।
आरबीआई के माध्यम से होगी ई-नीलामी
वित्त विभाग के अनुसार सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के माध्यम से ई-नीलामी प्रक्रिया द्वारा की जाएगी।
इस नीलामी में बैंक, बीमा कंपनियां, वित्तीय संस्थान और अन्य अधिकृत निवेशक हिस्सा ले सकेंगे। नीलामी से प्राप्त राशि सीधे राज्य सरकार के खाते में जमा होगी।
सरकार इस धनराशि का इस्तेमाल बजट में स्वीकृत विकास योजनाओं और पूंजीगत कार्यों के लिए करेगी।
700 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग राज्य में विभिन्न आधारभूत ढांचा परियोजनाओं पर किया जाएगा।
इनमें प्रमुख रूप से:
सड़क निर्माण और सुधार कार्य,
पुलों का निर्माण,
पेयजल योजनाएं,
स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार,
शिक्षा क्षेत्र की परियोजनाएं,
अन्य विकास कार्य
शामिल हैं।
वित्तीय वर्ष में चरणबद्ध तरीके से जुटाया जाता है ऋण
प्रदेश सरकार वित्तीय वर्ष के दौरान अपनी जरूरतों के अनुसार बाजार से चरणबद्ध तरीके से ऋण लेती है।
राज्यों को केंद्र सरकार और आरबीआई द्वारा निर्धारित उधार सीमा के भीतर वित्तीय संसाधन जुटाने की अनुमति होती है। सरकार का कहना है कि विकास कार्यों की निरंतरता बनाए रखने और पूंजीगत निवेश बढ़ाने के लिए यह प्रक्रिया आवश्यक है।
राज्य पर बढ़ेगा कर्ज का बोझ
हालांकि, नई उधारी के साथ हिमाचल प्रदेश पर कुल कर्ज का बोझ और बढ़ने की संभावना है।
सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार, 31 मार्च 2025 तक हिमाचल प्रदेश की कुल देनदारियां और बकाया ऋण 1.04 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो चुके हैं।
इसमें:
बाजार से लिया गया ऋण,
केंद्र सरकार से प्राप्त कर्ज,
सार्वजनिक खाते की देनदारियां,
अन्य वित्तीय दायित्व
शामिल हैं।
ऋण के सही इस्तेमाल से बढ़ सकती है आय
वित्त विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऋण राशि का उपयोग सड़क, पुल, सिंचाई, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी उत्पादक परिसंपत्तियों के निर्माण में किया जाता है तो इससे भविष्य में राज्य की आय बढ़ सकती है।
वहीं, लगातार बढ़ता कर्ज सरकार के ब्याज भुगतान और वित्तीय प्रबंधन पर दबाव भी डाल सकता है। ऐसे में विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के साथ वित्तीय अनुशासन बनाए रखना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी।
प्रदेश सरकार ने स्पष्ट किया है कि 700 करोड़ रुपये की ऋण प्रक्रिया आरबीआई के निर्धारित नियमों के अनुसार पूरी की जाएगी और प्राप्त राशि का उपयोग स्वीकृत विकास परियोजनाओं में ही किया जाएगा।
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