विभागीय जांच में शराब के नशे में स्कूल आने, सरकारी कर्तव्यों की उपेक्षा और छात्रों से दुर्व्यवहार के आरोप सिद्ध; शिक्षा निदेशक ने 31 जुलाई 2026 से अनिवार्य सेवानिवृत्ति के आदेश किए जारी।
हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग ने सरकारी विद्यालय में कार्यरत एक शिक्षक के खिलाफ बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए टीजीटी (नॉन-मेडिकल) मोहिंदर सिंह को अनिवार्य सेवानिवृत्त कर दिया है।
विभागीय जांच में शिक्षक पर लगाए गए शराब के नशे में विद्यालय पहुंचने, सरकारी कर्तव्यों की उपेक्षा करने, बिना अनुमति अनुपस्थित रहने तथा विद्यार्थियों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट करने के आरोप सिद्ध पाए गए।
इसके बाद शिक्षा निदेशालय ने केंद्रीय सिविल सेवा (सीसीए) नियम, 1965 के तहत कार्रवाई करते हुए उन्हें 31 जुलाई 2026 से अनिवार्य सेवानिवृत्त करने के आदेश जारी किए हैं।
विभागीय जांच में गंभीर आरोप साबित
शिक्षा विभाग के अनुसार मोहिंदर सिंह के खिलाफ केंद्रीय सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 1965 के नियम-14 के तहत विभागीय जांच शुरू की गई थी। जांच के दौरान उपलब्ध दस्तावेजों, गवाहों और अन्य साक्ष्यों के आधार पर यह पाया गया कि शिक्षक कई अवसरों पर शराब के नशे में विद्यालय पहुंचे,
सरकारी कार्यों की अनदेखी की, बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहे तथा छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार और मारपीट की।
विभाग ने इन कृत्यों को सरकारी कर्मचारी आचरण नियमों का गंभीर उल्लंघन माना।
शिक्षक ने आरोपों को बताया गलत
जांच के दौरान मोहिंदर सिंह ने सभी आरोपों से इनकार किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने सेवा काल में कठिन और दुर्गम क्षेत्रों में पूरी ईमानदारी से कार्य किया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि वह पैंक्रियाटाइटिस और मानसिक बीमारी से पीड़ित हैं तथा उनके खिलाफ दर्ज शिकायतें निराधार हैं।
शिक्षक ने प्रारंभिक जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए और वीडियो साक्ष्यों को छेड़छाड़ किया हुआ बताया।
जांच अधिकारी ने दलीलों को नहीं माना पर्याप्त
विभागीय जांच अधिकारी ने शिक्षक की ओर से प्रस्तुत दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद कहा कि बीमारी संबंधी दावे उन्हें आरोपों से मुक्त नहीं करते। जांच रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया कि शिक्षक यह साबित नहीं कर सके कि शिकायतें झूठी थीं या उनके खिलाफ प्रस्तुत साक्ष्यों में किसी प्रकार की छेड़छाड़ की गई थी।
रिपोर्ट के अनुसार उपलब्ध साक्ष्य शराब के नशे में विद्यालय आने, सरकारी दायित्वों की उपेक्षा करने और छात्रों के साथ दुर्व्यवहार करने के आरोपों की पुष्टि करते हैं।
शिक्षक से आदर्श आचरण की अपेक्षा
शिक्षा विभाग ने अपने आदेश में कहा है कि एक सरकारी शिक्षक से अनुशासन, ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और विद्यार्थियों के लिए आदर्श आचरण की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में शराब के नशे में विद्यालय पहुंचना, छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार करना और सरकारी जिम्मेदारियों की अनदेखी करना अत्यंत गंभीर कदाचार है, जिससे सरकारी शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता प्रभावित होती है।
भ्रष्टाचार का आरोप नहीं था
विभाग ने स्पष्ट किया कि इस मामले में वित्तीय अनियमितता या भ्रष्टाचार का कोई आरोप सामने नहीं आया। इसी कारण सेवा से बर्खास्तगी या पद से हटाने जैसी कठोर कार्रवाई के बजाय केंद्रीय सिविल सेवा (सीसीए) नियम, 1965 के नियम 11(7) के तहत अनिवार्य सेवानिवृत्ति का दंड उपयुक्त माना गया।
31 जुलाई 2026 से लागू हुआ आदेश
शिक्षा निदेशक आशीष कोहली द्वारा जारी आदेश के अनुसार राजकीय उच्च विद्यालय कंड (कॉम्प्लेक्स जीएमएसएसएस डारी), जिला कांगड़ा में कार्यरत टीजीटी (नॉन-मेडिकल) मोहिंदर सिंह को 31 जुलाई 2026 से अनिवार्य सेवानिवृत्त किया गया है।
आदेश में यह भी कहा गया है कि उन्हें सीसीएस (पेंशन) नियमों और राज्य सरकार के प्रचलित प्रावधानों के अनुसार पेंशन एवं अन्य सेवानिवृत्ति लाभ प्रदान किए जाएंगे।
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