बिलासपुर।
हिमाचल प्रदेश में अपना घर बनाने का सपना देख रहे लोगों को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। प्रदेश में ईंटों के दामों में 2 रुपये प्रति ईंट की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। वहीं, निर्माण कार्य से जुड़ी दूसरी सबसे अहम सामग्री, सीमेंट की कीमतों में भी 1 अप्रैल से वृद्धि होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।
ईंटों के दाम क्यों बढ़े?
भट्ठा मालिकों के अनुसार, ईंटों की कीमतों में इस बढ़ोतरी का मुख्य कारण कोयले और लेबर (मजदूरी) की लागत में हुआ इजाफा है। ईंट पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले कोयले के दामों में हाल के दिनों में काफी बढ़ोतरी हुई है।
डीजल की कीमतों और अन्य मालभाड़े में वृद्धि के कारण ईंटों को भट्ठे से निर्माण स्थल तक पहुँचाना महंगा हो गया है। हाल ही में हुई बेमौसमी बारिश के कारण कई भट्ठों में कच्ची ईंटें खराब हो गईं, जिससे उत्पादन लागत बढ़ गई है। वर्तमान में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में ईंटों के भाव अब ₹10 से ₹12 प्रति ईंट तक पहुँच गए हैं (गुणवत्ता और क्षेत्र के अनुसार)।
अप्रैल से सीमेंट भी होगा महंगा
सिर्फ ईंटें ही नहीं, अप्रैल महीने की शुरुआत से सीमेंट कंपनियां भी अपनी कीमतों में संशोधन करने की तैयारी में हैं। सूत्रों के मुताबिक कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता के कारण पेटकोक (Petcoke) और पैकेजिंग मटेरियल महंगा हो गया है।
मार्च-अप्रैल का समय कंस्ट्रक्शन का पीक सीजन होता है। इस दौरान मांग बढ़ने से कंपनियां अक्सर रेट बढ़ा देती हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सीमेंट के एक बैग (बोरी) पर ₹5 से ₹10 तक की बढ़ोतरी हो सकती है। फिलहाल हिमाचल में अलग-अलग कंपनियों के सीमेंट बैग की कीमत ₹395 से ₹440 के बीच चल रही है।
आम आदमी पर पड़ेगा बोझ
निर्माण सामग्री के दामों में इस दोहरी मार से मध्यम वर्ग का बजट बिगड़ गया है। एक औसत मध्यम वर्गीय घर बनाने के लिए हजारों ईंटों और सैकड़ों बोरी सीमेंट की जरूरत होती है। ईंट में ₹2 की मामूली दिखने वाली बढ़ोतरी भी कुल खर्च को ₹50,000 से ₹1,00,000 तक बढ़ा सकती है।