शिमला।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के चौड़ा मैदान में शुक्रवार को आउटसोर्स कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदेशभर के विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत सैकड़ों कर्मचारियों ने धरने में हिस्सा लिया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे पिछले 15 से 20 वर्षों से सरकारी विभागों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज तक उन्हें न तो नौकरी की सुरक्षा मिली है और न ही उचित वेतन। हाल ही में विभिन्न विभागों से आउटसोर्स कर्मचारियों को हटाए जाने की घटनाओं ने कर्मचारियों में असुरक्षा और डर का माहौल पैदा कर दिया है।
कर्मचारियों की मुख्य मांग है कि आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए स्थायी नीति बनाई जाए, नौकरी में सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और समान काम के लिए समान वेतन लागू किया जाए। उनका कहना है कि जब तक इन मांगों पर सरकार कोई ठोस निर्णय नहीं लेती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।
संयुक्त आउटसोर्स कर्मचारी संघ के संयोजक अश्विनी शर्मा ने कहा कि कर्मचारियों को महज 13 हजार रुपये के आसपास वेतन मिल रहा है, जिससे महंगाई के इस दौर में परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि कर्मचारी सरकारी कर्मचारियों की तरह ही काम करते हैं, लेकिन उन्हें न तो बराबरी का वेतन मिलता है और न ही भविष्य की कोई सुरक्षा।
कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द उनकी मांगों पर सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।