शिमला
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान उस समय असहज स्थिति पैदा हो गई, जब सत्ताधारी कांग्रेस पार्टी के ही विधायकों ने अपनी सरकार को कटघरे में खड़ा कर दिया। प्रश्नकाल के दौरान देहरा से विधायक कमलेश ठाकुर और ज्वालामुखी से विधायक संजय रतन ने विभागीय कार्यप्रणाली और लंबित विकास कार्यों को लेकर कड़े सवाल पूछे।
मुख्यमंत्री की धर्मपत्नी और देहरा से विधायक कमलेश ठाकुर ने अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्यों की धीमी गति पर नाराजगी जताई। उन्होंने विशेष रूप से जल शक्ति विभाग और लोक निर्माण विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल किए। उन्होंने सदन में पूछा कि घोषित परियोजनाओं के टेंडर होने में इतनी देरी क्यों हो रही है और बजट होने के बावजूद धरातल पर काम क्यों नहीं दिख रहा।
ज्वालामुखी के विधायक संजय रतन ने भी अपनी ही सरकार के मंत्रियों को घेरा। उन्होंने क्षेत्र में सड़कों की बदहाली और स्वास्थ्य सुविधाओं के अभाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बार-बार आग्रह के बावजूद अधिकारी फाइलों को दबाकर बैठे हैं, जिससे जनता के बीच सरकार की छवि पर असर पड़ रहा है।
जब सत्तापक्ष के विधायक ही अपनी सरकार की घेराबंदी कर रहे थे, तो विपक्ष (भाजपा) ने भी चुटकी लेने में कसर नहीं छोड़ी। नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जब सरकार के अपने विधायक ही खुश नहीं हैं, तो प्रदेश की जनता का क्या हाल होगा।
मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्रियों ने विधायकों को आश्वस्त किया कि सभी लंबित कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई होगी।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सत्तापक्ष के विधायकों द्वारा अपनी ही सरकार को सदन में घेरना कई संकेत देता है विधायकों पर अपने क्षेत्र की जनता को जवाब देने का भारी दबाव है। यह स्पष्ट है कि विधायक शासन में अधिकारियों की कार्यशैली से संतुष्ट नहीं हैं। सरकार का कहना है कि यह लोकतंत्र की खूबसूरती है जहाँ विधायक जनहित में अपनी ही सरकार से सवाल पूछ सकते हैं।