शिमला I
हिमाचल प्रदेश के उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर शिमला की सड़कों पर उतरी भाजपा को आड़े हाथों लिया है। भाजपा द्वारा निकाली गई 'आक्रोश रैली' को मंत्री ने 'सियासी नौटंकी' और 'चुनावी स्टंट' करार दिया।
उन्होंने तीखा सवाल दागते हुए कहा कि जो पार्टी आज महिलाओं की सबसे बड़ी हितैषी होने का दावा कर रही है, उसने अपने 46 साल के इतिहास में आज तक किसी महिला को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष क्यों नहीं बनाया?
हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि भाजपा केवल पांच राज्यों के आगामी चुनावों और 2024 के लोकसभा चुनावों को देखते हुए महिलाओं की सहानुभूति बटोरने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा महिला आरक्षण बिल सबसे पहले 1997 में कांग्रेस सरकार लाई थी, लेकिन तब भाजपा ने ही इसका कड़ा विरोध किया था।
2023 में जब यह बिल पास हुआ, तो इसे तुरंत लागू करने के बजाय जनगणना और परिसीमन (Delimitation) की शर्तों में उलझा दिया गया। इसे 2024 में लागू किया जा सकता था, लेकिन भाजपा ने इसे 2029 तक टालने का खेल रचा है। पांच राज्यों के चुनावों के बीच विशेष सत्र बुलाना यह दर्शाता है कि भाजपा की मंशा आरक्षण देने की नहीं, बल्कि इसे एक चुनावी मुद्दा बनाए रखने की है।
उद्योग मंत्री ने कांग्रेस और भाजपा के कार्यकालों की तुलना करते हुए कहा कि कांग्रेस ने हमेशा महिलाओं को नेतृत्व के अवसर दिए हैं। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद पर अब तक तीन-तीन महिलाएं (विद्या स्टोक्स, विप्लव ठाकुर और प्रतिभा सिंह) रह चुकी हैं।
इसके विपरीत, भाजपा ने 40-45 सालों में एक बार भी किसी महिला को प्रदेश या राष्ट्रीय स्तर पर अध्यक्ष की कुर्सी नहीं सौंपी। यदि वे इतने ही शुभचिंतक हैं, तो अपनी पार्टी के शीर्ष पदों पर महिलाओं को जगह क्यों नहीं देते?
शिमला में भाजपा द्वारा किए गए प्रदर्शन पर टिप्पणी करते हुए चौहान ने कहा कि यह पहली बार देखा गया कि भाजपा ने महिलाओं को मंच पर जगह दी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे पहले भाजपा के कार्यक्रमों में महिलाओं को केवल भीड़ के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। अब चुनाव करीब देख भाजपा महिलाओं को स्टेज पर बिठाकर महज 'सिम्पैथी' (सहानुभूति) लेने का प्रयास कर रही है।
हर्षवर्धन चौहान ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस पार्टी आरक्षण के पक्ष में है और चाहती है कि इसे बिना किसी शर्त के तत्काल लागू किया जाए। उन्होंने भाजपा को सलाह दी कि वे सड़कों पर ड्रामा करने के बजाय नीयत साफ करें और महिलाओं को वास्तव में सशक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाएं।