लीगल एड डिफेंस काउंसिल नीति के विरोध में हमीरपुर के वकीलों ने शुक्रवार को जिला न्यायालय परिसर के बाहर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हमीरपुर बार एसोसिएशन ने इस नीति के विरोध में दो दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया है। इस दौरान वकील अदालतों में पेश नहीं होंगे और न्यायिक कार्य से दूर रहेंगे।
वकीलों का कहना है कि लीगल एड डिफेंस काउंसिल व्यवस्था लागू होने से अधिवक्ताओं की स्वतंत्र रूप से वकालत करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। उनका आरोप है कि यह नीति मौजूदा न्यायिक प्रणाली और वकीलों के कार्य क्षेत्र पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। इसी वजह से प्रदेश की कई बार एसोसिएशन इस नीति का विरोध कर रही हैं।
बार एसोसिएशन ने नीति पर उठाए सवाल
हमीरपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील कौंडल ने कहा कि लीगल एड डिफेंस काउंसिल पॉलिसी को लेकर अधिवक्ताओं में नाराजगी है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस व्यवस्था के तहत निशुल्क कानूनी सहायता का लाभ ऐसे लोगों को भी मिल सकता है, जो नशे या अन्य गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस नीति के तहत सरकार द्वारा नियुक्त वकील ही सरकार की ओर से संचालित व्यवस्था के खिलाफ खड़े होंगे, जिससे कई व्यावहारिक समस्याएं पैदा हो सकती हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से इस नीति पर दोबारा विचार करने की मांग की।
सुनील कौंडल ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस नीति में बदलाव नहीं किया तो अधिवक्ताओं का विरोध और आंदोलन आगे भी जारी रह सकता है।
युवा अधिवक्ताओं के हितों पर असर का दावा
अधिवक्ता निशा वर्मा ने कहा कि इस नीति का सबसे अधिक प्रभाव युवा अधिवक्ताओं पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि नई व्यवस्था लागू होने से युवा वकीलों के लिए रोजगार और नियमित प्रैक्टिस के अवसर प्रभावित हो सकते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि कई अधिवक्ताओं को अपनी इच्छा के विपरीत काउंसिल के तहत केस लड़ने पड़ सकते हैं। उनका कहना है कि इससे वकीलों के कार्य क्षेत्र पर असर पड़ेगा और न्याय व्यवस्था से जुड़े कई पहलुओं पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट में भी जारी है विरोध
गौरतलब है कि पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट में भी वकीलों द्वारा 6 जुलाई से लीगल एड डिफेंस काउंसिल पॉलिसी का विरोध किया जा रहा है। इसी विरोध के समर्थन में हमीरपुर बार एसोसिएशन ने दो दिवसीय हड़ताल का निर्णय लिया है।
फिलहाल वकीलों का कहना है कि जब तक इस नीति को लेकर उनकी चिंताओं का समाधान नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा।
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