कोटखाई के सेब कारोबारी ने दी सलाह, कहा- आने वाले 15 से 20 दिन गुणवत्तापूर्ण सेब के लिए अहम; कश्मीर की फसल से बाजार में आया मामूली दबाव
हिमाचल प्रदेश में सेब सीजन की शुरुआत के साथ ही मंडियों में हलचल बढ़ गई है। शुरुआती दौर में सेब की खरीद-बिक्री और बाजार की स्थिति का जायजा लेने के लिए कारोबारी भी सक्रिय हो गए हैं। इसी बीच ग्राम चौगान, तहसील कोटखाई के सेब कारोबारी देवेंद्र जस्टा ने प्रदेश के बागवानों को महत्वपूर्ण सलाह दी है।
उन्होंने बागवानों से अपील की है कि वे जल्दबाजी में अपनी फसल मंडियों में न भेजें और सेब को पूरी तरह तैयार होने दें। उनका कहना है कि आने वाले 15 से 20 दिन अच्छे और गुणवत्तापूर्ण सेब के लिए बेहतर कीमत दिलाने में अहम साबित हो सकते हैं।
देवेंद्र जस्टा अपने सेब कंसाइनमेंट को लेकर SF-T 112 के माध्यम से बाजार पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि उनके सेब की सप्लाई देश के विभिन्न हिस्सों में होती है, जबकि कुछ माल विदेशों में भी निर्यात किया जाता है।
सीजन की शुरुआत में वह रेड डिलीशियस और गाला वैरायटी लेकर बाजार की स्थिति समझने पहुंचे थे। उनका उद्देश्य यह जानना था कि इस बार कौन-सी मार्केट उनके उत्पाद के लिए बेहतर और सुरक्षित साबित हो सकती है।
बाजार का निरीक्षण करने के बाद उन्होंने मौजूदा स्थिति पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि यदि बागवान अच्छी गुणवत्ता वाला, पूरी तरह तैयार और स्वादिष्ट सेब बाजार में लाएंगे तो इससे खरीदारों का भरोसा बढ़ेगा और मांग मजबूत होगी।
कच्चे सेब की आवक से बाजार पर पड़ सकता है असर
देवेंद्र जस्टा ने कहा कि बागवानों को हरे, कच्चे और कम गुणवत्ता वाले सेब को जल्दबाजी में बाजार में उतारने से बचना चाहिए। उनका कहना है कि शुरुआत में यदि खराब गुणवत्ता का माल बाजार में पहुंचता है तो इसका असर पूरे सेब कारोबार पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि ग्राहक हमेशा ऐसा सेब खरीदना पसंद करते हैं, जिसका स्वाद बेहतर हो। यदि ग्राहक को अच्छा अनुभव मिलेगा तो वह दोबारा उसी उत्पाद की मांग करेगा, जिससे बाजार में स्थायी मांग बनेगी और बागवानों को बेहतर दाम मिल सकेंगे।
कश्मीर की फसल से बाजार में आया हल्का दबाव
देवेंद्र जस्टा ने बताया कि इस बार कश्मीर में भी अच्छी सेब फसल होने की जानकारी मिल रही है। कश्मीर की गाला सहित अन्य वैरायटी बड़े बाजारों तक पहुंचने लगी हैं।
उन्होंने कहा कि इसके चलते ऑल इंडिया मार्केट में करीब 200 से 400 रुपये तक का स्लंप देखने को मिला है। हालांकि, उन्होंने इसे बाजार की सामान्य प्रक्रिया बताया और कहा कि गुणवत्तापूर्ण हिमाचली सेब की अपनी अलग पहचान है।
हिमाचल और कश्मीर के बागवानों से अपील
देवेंद्र जस्टा ने केवल हिमाचल ही नहीं बल्कि कश्मीर के बागवानों से भी अपील की कि वे जल्दबाजी में अपनी फसल बाजार में न भेजें।
उन्होंने कहा कि यदि दोनों राज्यों के बागवान अच्छी तरह तैयार और बेहतर गुणवत्ता वाला सेब बाजार में लाएंगे तो इससे पूरे सेब उद्योग को फायदा होगा। गुणवत्ता वाला उत्पाद ही ग्राहक को आकर्षित करता है और लंबे समय तक बाजार में मांग बनाए रखता है।
उन्होंने कहा कि सेब बाजार में डिमांड और सप्लाई का संतुलन गुणवत्ता के आधार पर ही बनता है। अच्छा स्वाद और बेहतर गुणवत्ता ही भविष्य में अच्छे दाम तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाएगी।
बागवानों के लिए संदेश
देवेंद्र जस्टा का कहना है कि इस बार सेब के अच्छे दाम मिलने की संभावना बनी हुई है, लेकिन इसके लिए बागवानों को धैर्य रखना होगा। गुणवत्ता से समझौता और जल्दबाजी में तुड़ाई करना भविष्य में नुकसान का कारण बन सकता है।
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