जंगलों में चौड़ी पत्ती वाले पौधों के साथ आबाला, हरड़, नीम और तूनी की प्रजातियां लगाई जाएंगी, पिछले वर्ष सूख चुके पौधों को भी बदला जाएगा।
मानसून सीजन के दौरान पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए वन विभाग ने इस वर्ष जिलेभर में करीब 1.25 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। सभी वन सर्किलों में पौधरोपण अभियान शुरू हो चुका है। विभाग का उद्देश्य हरित क्षेत्र बढ़ाने के साथ-साथ पिछले वर्ष लगाए गए सूख चुके पौधों को भी नए पौधों से प्रतिस्थापित करना है।
चौड़ी पत्ती वाले पौधों को मिलेगी प्राथमिकता
वन विभाग इस बार जंगलों में मुख्य रूप से चौड़ी पत्ती वाले पौधों का रोपण करेगा। इसके अलावा विभाग की स्थानीय नर्सरियों में तैयार आबाला, हरड़, नीम और तूनी जैसी प्रजातियों के पौधे भी लगाए जाएंगे, जिससे स्थानीय जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा।
पिछले वर्ष सूखे पौधों को भी किया जाएगा रिप्लेस
वन विभाग ने बताया कि पिछले मानसून में लगाए गए जिन पौधों का विकास नहीं हो सका या जो सूख गए हैं, उनकी पहचान कर इस सीजन में नए पौधे लगाए जाएंगे। इससे पौधरोपण अभियान की सफलता दर बढ़ाने में मदद मिलेगी।
इस अभियान में महिला मंडलों, युवक मंडलों, स्कूलों, कॉलेजों और विभिन्न सरकारी विभागों को भी शामिल किया जाएगा। विद्यार्थियों की सहभागिता से न केवल पौधरोपण होगा बल्कि पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी और पौधों की देखभाल सुनिश्चित की जा सकेगी।
डीएफओ ने क्या कहा?
डीएफओ अंकित कुमार सिंह ने बताया कि इस वर्ष जिले में एक लाख से अधिक पौधे लगाए जाएंगे। उन्होंने कहा कि जहां पिछले वर्ष लगाए गए पौधे सूख गए हैं, वहां नए पौधे लगाए जाएंगे। वन विभाग विभिन्न सामाजिक संगठनों, महिला मंडलों, शिक्षण संस्थानों और अन्य विभागों के सहयोग से व्यापक पौधरोपण अभियान चला रहा है।
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