देहरादून
उत्तराखंड के देहरादून जिले के सेलाकुई क्षेत्र से क्रूरता और घरेलू हिंसा का एक ऐसा रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को तार-तार कर दिया है।
यहाँ भाउवाला सैनिक कॉलोनी में एक विवाहिता को उसके पति और ससुराल वालों ने कथित तौर पर पिछले 10 महीनों से कमरे के भीतर बने एक शौचालय में कैद कर रखा था। इस दौरान महिला को गंभीर शारीरिक व मानसिक यातनाएं दी गईं और उसे उसके नवजात जुड़वां बच्चों से भी अलग रखा गया।
पीड़िता के पिता की शिकायत पर सेलाकुई पुलिस ने पति सहित ससुराल पक्ष के खिलाफ गंभीर धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है।
ग्राम प्रधान की मदद से घुसे माता-पिता, तो शौचालय से मिली बदहवास साक्षी
यह खौफनाक दास्तां 30 मई को तब उजागर हुई, जब पीड़िता साक्षी के माता-पिता स्थानीय ग्राम प्रधान और पंचायत प्रतिनिधियों की मदद से किसी तरह उसकी ससुराल में दाखिल हुए।
वहाँ उन्होंने साक्षी को शौचालय से बेहद बदहवास और भ्रमित स्थिति में बरामद किया। यातनाओं का असर इस कदर था कि साक्षी को दिन, महीना या साल तक याद नहीं आ रहा था। पीड़िता के पिता संजीव बहुगुणा की लिखित शिकायत के आधार पर पुलिस ने दामाद राहुल खंडूरी और सास-ससुर के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है।
नवजात जुड़वां बच्चों से किया अलग, खाने को दिए सिर्फ कच्चे चावल और प्याज
शिकायत के अनुसार, साक्षी ने फरवरी 2025 में जुड़वां बच्चों को जन्म दिया था। बच्चों के जन्म के कुछ ही महीनों बाद, यानी 1 जुलाई से साक्षी को अपने ही घर में बंधक बना लिया गया।
आरोपियों ने नवजात बच्चों को मां से पूरी तरह अलग कर दिया; साक्षी को उन्हें छूने या गोद में लेने तक की इजाजत नहीं थी। पिछले 10 महीनों से साक्षी को रोजाना सुबह 9-10 बजे शौचालय में बंद कर दिया जाता था, जहाँ वह पूरी रात कैद रहती थी। जीवित रहने के लिए उसे केवल नाममात्र के कच्चे चावल, एक प्याज, नमक और हरी मिर्च दी जाती थी।
लोहे की छड़, कुर्सियों और वाइपर से बर्बरता; निजी अंगों पर भी वार
पिता संजीव बहुगुणा ने आरोप लगाया कि ससुराल वाले साक्षी को लोहे की छड़, डंडों, कुर्सियों और वाइपर से बेरहमी से पीटते थे, जिसके कारण उसके पूरे शरीर पर चोटों के गहरे निशान हैं।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया है कि आरोपियों ने बोतलों और छड़ों से साक्षी के निजी अंगों को गंभीर रूप से घायल किया और मारपीट के दौरान उसके सिर के बाल तक उखाड़ दिए गए। 10 महीने तक माता-पिता को बेटी से मिलने या फोन पर बात करने नहीं दी गई; जब भी फोन आता, सास यह कहकर गुमराह कर देती कि साक्षी सो रही है या नहा रही है।
मामले की जांच अधिकारी शशि राणा ने बताया कि शिकायत के आधार पर संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू कर दी गई है। पीड़िता की गंभीर स्थिति को देखते हुए जल्द ही मैजिस्ट्रेट के समक्ष उसके बयान दर्ज किए जाएंगे, जिसके आधार पर आरोपियों की गिरफ्तारी सहित आगे की सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।