मुख्यमंत्री से लिपटकर रोई थी पांचवीं की छात्रा वंशिका, मां को पास बुलाने की लगाई थी गुहार; अगले ही दिन जारी हुए ट्रांसफर ऑर्डर
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू के सामने एक बच्ची की भावुक गुहार का असर महज 24 घंटे में देखने को मिला। दो साल से मां से दूर रहने की पीड़ा झेल रही पांचवीं कक्षा की छात्रा वंशिका के आंसुओं ने मुख्यमंत्री का दिल पिघला दिया।
मुख्यमंत्री के आश्वासन के अगले ही दिन उसकी मां के तबादले के आदेश जारी हो गए। करीब 700 किलोमीटर दूर तैनात मां अब बेटी के घर के पास नौकरी करेंगी।
मामला चंबा जिले के देहग्रां में बुधवार को आयोजित 'सरकार गांव के द्वार' कार्यक्रम का है। इस दौरान तीसा की राजकीय प्राथमिक पाठशाला सत्यास में पांचवीं कक्षा में पढ़ने वाली वंशिका मुख्यमंत्री से लिपटकर फूट-फूटकर रोने लगी।
उसने बताया कि उसकी मां काफी दूर नौकरी करती हैं और वह पिछले दो साल से उनसे दूर रह रही है। बच्ची ने मुख्यमंत्री से भावुक अपील करते हुए मां को घर के पास तैनात करवाने की गुहार लगाई थी। मुख्यमंत्री ने उसे आश्वासन दिया था कि उसकी मां को घर के नजदीक तैनात करने के लिए कदम उठाए जाएंगे।
मुख्यमंत्री के आश्वासन के करीब 24 घंटे के भीतर स्कूल शिक्षा निदेशालय ने पांच प्रतिशत स्थानांतरण नीति के तहत जेबीटी शिक्षिका नरो देवी के अंतर जिला तबादले के आदेश जारी कर दिए।
नरो देवी पहले शिमला जिले के शिक्षा खंड नेरवा की राजकीय प्राथमिक पाठशाला सोवल में तैनात थीं। अब उन्हें चंबा जिले के शिक्षा खंड तीसा की राजकीय प्राथमिक पाठशाला चंडरू में नियुक्त किया गया है। स्कूल शिक्षा विभाग के निदेशक आशीष कोहली के अनुसार, स्थानांतरण प्रतिबंध में छूट देकर यह तबादला किया गया है।
वंशिका के पिता गिरीश कुमार किसान हैं। वंशिका और उसका भाई गांव में पिता के साथ रहते हैं। मुख्यमंत्री से मुलाकात के दौरान वंशिका ने यह भी बताया था कि वह जवाहर नवोदय विद्यालय में पढ़ना चाहती है और भविष्य में आईपीएस अधिकारी बनना उसका सपना है।
मां के तबादले से वंशिका के चेहरे पर लौटी मुस्कान
मां के तबादले के आदेश जारी होते ही वंशिका और उसके परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। वंशिका ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि मां अब उसके पास आ गई हैं और उसे अकेले नहीं रहना पड़ेगा। उसने कहा कि मुख्यमंत्री अंकल ने जो वादा किया था, उसे पूरा कर दिया है। अब वह मां के आंचल की छांव में बेफिक्र होकर नवोदय विद्यालय में प्रवेश और आगे की पढ़ाई पर ध्यान दे सकेगी।
वहीं, मां नरो देवी ने भी मुख्यमंत्री का आभार जताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने एक मासूम बच्ची की पीड़ा को समझते हुए कुछ ही घंटों में इतनी बड़ी राहत दी है। अब वह बच्चों की पढ़ाई और परवरिश पर बेहतर तरीके से ध्यान दे सकेंगी।
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