सरकाघाट (मंडी):
हिमाचल पथ परिवहन निगम (HRTC) के कर्मचारियों और पेंशनरों द्वारा अपनी मांगों को लेकर शुरू किए गए आंदोलन को अब अन्य मजदूर संगठनों का भी खुला समर्थन मिलने लगा है। सीटू (CITU) मंडी जिला कमेटी के प्रधान भूपेंद्र सिंह ने एचआरटीसी कर्मियों की मांगों का पुरजोर समर्थन किया है।
बुधवार को सरकाघाट में क्षेत्रीय प्रबंधक (RM) कार्यालय के बाहर आयोजित कर्मचारियों की गेट मीटिंग में विशेष रूप से शामिल होकर उन्होंने सीटू की ओर से इस हड़ताल को पूर्ण समर्थन देने का औपचारिक ऐलान किया।
भूपेंद्र सिंह ने प्रदेश सरकार के कड़े रुख पर गहरी हैरानी और रोष व्यक्त करते हुए कहा कि कर्मचारियों की जायज और लंबे समय से लंबित मांगों को पूरा करने के बजाय सरकार उनके लोकतांत्रिक आंदोलन को दमनकारी नीतियों से कुचलने का प्रयास कर रही है, जो पूरी तरह से तानाशाही है।
उन्होंने कानूनी पक्षों का हवाला देते हुए कहा कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 19, ट्रेड यूनियन एक्ट 1926 और औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 देश के प्रत्येक कर्मचारी को अपनी मांगों के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन करने का वैधानिक अधिकार देते हैं। इसके बावजूद सरकार द्वारा आंदोलन को दबाने के लिए 'एस्मा' (ESMA) लगाना न्यायसंगत नहीं है।
वित्तीय लाभ न मिलने से पेंशनरों की हालत दयनीय, दिहाड़ी पर भर्ती का विरोध
सीटू नेता ने कहा कि एचआरटीसी के चालक-परिचालक दिन-रात जनता को बेहतर सुविधाएं दे रहे हैं, लेकिन सरकार उन्हें न्यूनतम भत्ते देने में भी असमर्थ साबित हुई है। कर्मचारियों का ओवरटाइम, रात्रि भत्ता, महंगाई भत्ता (DA) का एरियर और चिकित्सा प्रतिपूर्ति के दावे लंबे समय से लटके हैं।
इससे भी बदतर स्थिति पेंशनरों की है, जिन्हें ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट, संशोधित पेंशन और पे-मैट्रिक्स का भुगतान नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले 15 दिनों से चल रहे क्रमिक आंदोलन के बाद ही कर्मचारियों ने आज रात 12 बजे से चक्का जाम का फैसला लिया है।
सरकार द्वारा इसके विकल्प में ₹1500 दिहाड़ी पर चालकों की नई भर्ती शुरू करने के फैसले का सीटू कड़ा विरोध करती है।
सीटू ने प्रदेश सरकार से मांग की है कि वह कर्मचारियों को डराने या एस्मा लगाने के बजाय तुरंत वार्ता की मेज पर आए, दमनात्मक फैसलों को वापस ले और कर्मचारियों व पेंशनरों के सभी वित्तीय देयकों का समयबद्ध भुगतान करे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया गया, तो आगामी दिनों में आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा।