चलो चंबा लर्निंग ट्रेल्स के तहत चमीणू में क्रॉस कल्चर एक्सचेंज का आयोजन, कारगिल से 48 और लेह से पहुंचे 65 प्रतिभागी
हिमाचल प्रदेश के चंबा जिले के चमीणू में हिमाचल और लद्दाख की लोकसंस्कृति का अनूठा संगम देखने को मिला। चलो चंबा लर्निंग ट्रेल्स (लद्दाख-चंबा संस्करण 2026) अभियान के तहत आयोजित क्रॉस कल्चर एक्सचेंज कार्यक्रम में कारगिल और लेह से पहुंचे 113 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस दौरान दोनों क्षेत्रों के पारंपरिक लोकनृत्य, लोकगीत और संगीत की प्रस्तुतियों ने समां बांध दिया।
चमीणू स्थित 'नॉट ऑन मैप एचटूओ आनंदम' में सोमवार शाम आयोजित इस सांस्कृतिक संध्या में कारगिल से 48 और लेह-लद्दाख की शाम घाटी के 12 सीमांत गांवों से 65 पर्यटन हितधारक शामिल हुए। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य हिमालयी क्षेत्रों की लोकसंस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली का आदान-प्रदान करना तथा समुदाय आधारित पर्यटन को बढ़ावा देना रहा।
सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण चंबा और लद्दाख के पारंपरिक लोकनृत्य और संगीत की प्रस्तुतियां रहीं। लद्दाख के पारंपरिक लोकगीतों और पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों के नृत्य ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया। वहीं, चमीणू गांव की राखी, पायल और नव्या ने मंच पर मनमोहक प्रस्तुति देकर खूब वाहवाही बटोरी।
चंबा के लोककलाकारों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों और बांसुरी वादन से माहौल को संगीतमय बना दिया। कारगिल और लेह से आए प्रतिनिधियों ने भी पारंपरिक नाटी और लद्दाखी धुनों पर कदम मिलाए। इससे दोनों हिमालयी क्षेत्रों के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव और मजबूत हुआ।
शिक्षाविदों, अधिकारियों और खिलाड़ियों की रही मौजूदगी
कार्यक्रम में जिला पर्यटन विकास अधिकारी (डीटीडीओ) राजीव मिश्रा मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इसके अलावा उच्च शिक्षा विभाग के सेवानिवृत्त संयुक्त निदेशक डॉ. विद्यासागर, राजकीय महाविद्यालय चंबा के प्रधानाचार्य डॉ.
राकेश राठौर, प्रोफेसर अविनाश, डॉ. केशव वर्मा, भूरी सिंह संग्रहालय के क्यूरेटर सुरेंद्र ठाकुर, संस्कृति प्रेमी देवेंद्र पुरी, शारीरिक शिक्षा डीपीई विनोद मेहता और डॉ. नवदीप भी शामिल हुए।
आर्ट ऑफ लिविंग गुरुकुल के बच्चों, मिस्टिक विलेज चमीणू, खजियार और दवाट महादेव क्लस्टर के सदस्यों सहित खेलो इंडिया सेंटर कबड्डी के युवा खिलाड़ियों ने भी कार्यक्रम में भागीदारी की।
फील्ड विजिट के जरिए समझा सामुदायिक पर्यटन मॉडल
जिला प्रशासन चंबा, नॉट ऑन मैप और लेह की फिरगुन सोशल इनिशिएटिव फाउंडेशन की संयुक्त पहल के तहत लद्दाखी प्रतिनिधिमंडल ने चंबा के मिस्टिक विलेज खजियार, चमीणू, बरौर और दवाट महादेव का अध्ययन दौरा किया।
प्रतिनिधियों ने खजियार के विभिन्न होमस्टे और कुटीरों में पर्यटकों के ठहराव, स्वच्छता और आतिथ्य की व्यवस्थाओं को समझा। इनमें ब्राह्मी देवी कुटीर, दुर्गो देवी कुटीर, इसरो देवी कुटीर, शिव सुख कुटीर, रजनी कुटीर, श्रवण कुटीर, कांता कुटीर, सुमित्रा कुटीर, कमला देवी कुटीर और शीला देवी कुटीर सहित अन्य स्थान शामिल रहे।
इसके अलावा धौलापीर कैंपसाइट, माउंटेन व्यू, रजत और ठाकुर होमस्टे का भी दौरा किया गया। प्रतिनिधियों ने हिम सखी, हिमस्वाद, हिम सरोई, गाब्दिका और अमरदीप स्वयं सहायता समूहों की ओर से संचालित 'गांव की हट्टी' और 'वुमेन कम्युनिटी किचन' के माध्यम से स्थानीय आर्थिकी को मजबूत करने के मॉडल को भी समझा।
लद्दाख के प्रतिनिधियों ने चंबा के इस सामुदायिक पर्यटन मॉडल को अपने-अपने गांवों में लागू करने का संकल्प दोहराया।
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