प्रदेश सरकार ने सरकारी शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाने के उद्देश्य से राज्यभर के 150 सरकारी स्कूलों को सीबीएसई पैटर्न में परिवर्तित किया है। वर्ष 2026-27 सत्र से इन स्कूलों में सीबीएसई पाठ्यक्रम भी लागू कर दिया गया है।
सरकार इसे शिक्षा क्षेत्र में बड़ा सुधार बताते हुए विद्यार्थियों के बेहतर भविष्य का दावा कर रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात इन दावों से मेल खाते नहीं दिख रहे हैं।
जून माह का दूसरा सप्ताह शुरू हो चुका है और स्कूलों में नया शैक्षणिक सत्र भी आरंभ हो गया है, लेकिन अब तक इन सीबीएसई स्कूलों में सीबीएसई मानकों के अनुरूप शिक्षकों की तैनाती नहीं हो पाई है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि केवल बोर्ड बदल देने से क्या शिक्षा व्यवस्था में सुधार आ जाएगा या फिर उसके अनुरूप संसाधन और योग्य शिक्षकों की उपलब्धता भी उतनी ही आवश्यक है।
विशेष बात यह है कि जिन शिक्षकों ने वर्षों तक हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड (HPBOSE) के तहत संचालित स्कूलों में अपनी सेवाएं दी हैं और जिन्हें सीबीएसई स्कूलों में पढ़ाने के लिए चयनित किया जाना था, उन्हीं शिक्षकों के लिए सरकार ने विशेष पात्रता परीक्षा आयोजित करवाई थी।
इस प्रक्रिया के तहत करीब 12 हजार शिक्षकों के पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे। लगभग 10 हजार शिक्षकों ने आवेदन किया और करीब 7500 शिक्षक परीक्षा में सफल भी रहे। इसके बावजूद अब तक सफल शिक्षकों की नियुक्ति या तैनाती नहीं हो पाई है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सीबीएसई पाठ्यक्रम को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए प्रशिक्षित और चयनित शिक्षकों की उपलब्धता सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है। यदि स्कूलों में पढ़ाने के लिए आवश्यक शिक्षक ही मौजूद नहीं होंगे तो विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना मुश्किल होगा।
अभिभावकों का कहना है कि सरकार ने स्कूलों को सीबीएसई से संबद्ध तो कर दिया, लेकिन शिक्षकों की नियुक्ति में हो रही देरी से विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है। नए सत्र की शुरुआत के बावजूद कई स्कूलों में शिक्षक तैनाती को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
ऐसे में प्रदेश सरकार की शिक्षा सुधार की पहल पर सवाल उठना स्वाभाविक है। शिक्षा के क्षेत्र में वास्तविक बदलाव तभी संभव है जब केवल बोर्ड बदलने तक सीमित न रहकर विद्यार्थियों को प्रशिक्षित शिक्षक, बेहतर शैक्षणिक वातावरण और आवश्यक संसाधन भी उपलब्ध कराए जाएं।
फिलहाल 150 सीबीएसई स्कूलों में पढ़ने वाले हजारों विद्यार्थियों का भविष्य शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहा है।