धर्मशाला।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच चल रही तकरार अब व्यक्तिगत हमलों और तीखी बयानबाजी तक पहुँच गई है। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश सह-मीडिया प्रभारी एडवोकेट विश्व चक्षु ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के आचरण पर कड़ा प्रहार करते हुए उन्हें अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाने की सलाह दी है।
"अनुभव के आगे झुका अहंकार"
विश्व चक्षु ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री सदन के भीतर अमर्यादित और असंसदीय शब्दावली का प्रयोग कर विपक्ष को नीचा दिखाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा मुख्यमंत्री अपनी पुरानी आदतों से मजबूर हैं।
आज सदन में जिस तरह उन्होंने शब्दों का चयन किया, वह छह बार के विधायक और पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के धैर्य और लंबे संसदीय अनुभव के आगे पूरी तरह बौने साबित हुए। यह नेता प्रतिपक्ष की शालीनता ही थी कि मुख्यमंत्री को न केवल माफी मांगनी पड़ी, बल्कि अपने शब्दों को सदन की कार्यवाही से हटवाना भी पड़ा।
पद की गरिमा और प्रशासनिक अनुभव पर सवाल
भाजपा नेता ने मुख्यमंत्री के राजनीतिक सफर पर तंज कसते हुए कहा कि सीधे मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठने के कारण उनमें वह शालीनता और अनुभव नजर नहीं आता जो इस संवैधानिक पद की मांग है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को "छात्र संगठन चलाने जैसी हरकतों" को त्याग कर गंभीर आचरण अपनाना चाहिए। विश्व चक्षु के अनुसार, मंत्री पद का अनुभव न होने के कारण मुख्यमंत्री पद की गरिमा के अनुरूप व्यवहार करने में विफल रहे हैं।
बजट को बताया "अहंकार से भरा और दिशाहीन"
कांग्रेस सरकार द्वारा पेश किए गए बजट को भाजपा ने पूरी तरह से नकार दिया है। भाजपा नेता ने इस बजट को निम्नलिखित बिंदुओं पर घेरा आम जनमानस के हितों की पूरी तरह अनदेखी की गई है। बजट दस्तावेज मुख्यमंत्री की "प्रशासनिक नालायकी" का स्पष्ट प्रमाण है। बजट में विकास के बजाय राजनीतिक प्रतिशोध और खोखली बयानबाजी को प्राथमिकता दी गई है।