धर्मशाला।
पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ भाजपा नेता बिक्रम ठाकुर ने हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा एचआरटीसी (HRTC) कर्मचारियों पर छह महीने तक हड़ताल करने पर लगाए गए प्रतिबंध और आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (ESMA) लागू करने के निर्णय की तीखी आलोचना की है।
मंडी में जारी एक बयान में उन्होंने इस कदम को कांग्रेस सरकार की तानाशाही और कर्मचारी विरोधी मानसिकता का जीता-जागता परिचायक बताया। बिक्रम ठाकुर ने कहा कि लोकतंत्र में हर वर्ग को अपनी बात रखने और शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन सुक्खू सरकार संवाद स्थापित करने के बजाय दमनकारी नीतियों और कानूनों का
भय दिखाकर कर्मचारियों की आवाज को कुचलना चाहती है।
समस्याओं के समाधान से भाग रही कांग्रेस, बदहाली के आंसू रो रहा निगम
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार एचआरटीसी कर्मचारियों की वाजिब समस्याओं का स्थायी समाधान करने में पूरी तरह विफल रही है। कर्मचारियों को समय पर वेतन, भत्ते और अन्य लंबित वित्तीय लाभ नहीं मिल रहे हैं, जिससे उनमें भारी आक्रोश है।
उन्होंने निगम की वर्तमान स्थिति पर चिंता जताते हुए कहा कि एचआरटीसी में बसों की भारी कमी है, चालकों-परिचालकों सहित विभिन्न श्रेणियों के सैकड़ों पद खाली पड़े हैं, और संसाधनों का घोर अभाव है।
सरकार इन बुनियादी समस्याओं को दूर करने के बजाय केवल प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रही है। उन्होंने याद दिलाया कि चुनाव से पहले कर्मचारियों के हितों की बड़ी-बड़ी बातें करने वाली कांग्रेस के राज में आज वही कर्मचारी अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
फैसले पर पुनर्विचार करे सरकार, भाजपा पुरजोर तरीके से देगी साथ
बिक्रम ठाकुर ने कहा कि 'एस्मा' जैसे कड़े कानून का उपयोग बेहद असाधारण परिस्थितियों में किया जाता है, लेकिन हिमाचल की वर्तमान सरकार इसे अपनी प्रशासनिक और वित्तीय विफलताओं को छिपाने के हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही है, जो कि अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और निंदनीय है।
उन्होंने प्रदेश सरकार से मांग की है कि हड़ताल पर लगाए गए इस छह महीने के प्रतिबंध और एस्मा लागू करने के फैसले पर तुरंत पुनर्विचार किया जाए तथा एचआरटीसी कर्मचारी संगठनों के साथ टेबल पर बैठकर उनकी लंबित मांगों का तत्काल समाधान निकाला जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि भाजपा कर्मचारियों के अधिकारों और आत्मसम्मान की रक्षा के लिए उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी रहेगी और इस कर्मचारी विरोधी नीति का हर स्तर पर विरोध करेगी।