शिमला।
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में उस समय अजीबोगरीब स्थिति पैदा हो गई जब सत्ताधारी दल कांग्रेस के कद्दावर नेता और बिलासपुर के पूर्व विधायक बम्बर ठाकुर विधानसभा के बाहर अपनी ही सरकार के खिलाफ धरने पर बैठ गए। बम्बर ठाकुर ने अपनी सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए बिलासपुर के भाजपा विधायक त्रिलोक जमवाल को तुरंत गिरफ्तार करने की मांग की है।
बम्बर ठाकुर का सीधा आरोप है कि बिलासपुर में माइनिंग माफिया बेखौफ होकर काम कर रहा है और प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है। उन्होंने कहा बिलासपुर में एक कॉलेज का निर्माण किया जा रहा है, जहाँ धड़ल्ले से अवैध खनन हो रहा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस अवैध खेल में भाजपा विधायक त्रिलोक जमवाल शामिल हैं, लेकिन बार-बार शिकायत के बावजूद पुलिस और प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा।
बम्बर ठाकुर ने केवल खनन ही नहीं, बल्कि प्रदेश में हुए राजनीतिक घटनाक्रम पर भी बड़ा हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि त्रिलोक जमवाल ही कांग्रेस विधायकों को तोड़ने और उनकी सुख-सुविधाओं (हेलीकॉप्टर और होटल) का इंतजाम करने के मुख्य सूत्रधार थे।पुलिस की जांच में मुख्य अभियुक्त पाए जाने के बावजूद अब तक उनकी गिरफ्तारी क्यों नहीं
हुई? उन्होंने आरोप लगाया कि डीजीपी ऑफिस के बगल में ही विधायक के भाई उमापति जमवाल को बिठाया गया है, जो जांच को प्रभावित कर रहे हैं।
पूर्व विधायक ने भावुक होते हुए कहा कि उन्हें और उनके परिवार को माफिया द्वारा जान से मारने की धमकियां दी जा रही हैं। हालांकि मुख्यमंत्री ने उन्हें सुरक्षा मुहैया करवाई है, लेकिन हमले की साजिश रचने वाले असली चेहरों तक पुलिस अभी भी नहीं पहुँच पाई है। उन्होंने बिलासपुर के अधिकारियों को 'बेलगाम' करार देते हुए कहा कि वे माफिया के दबाव में काम कर रहे हैं।
बम्बर ठाकुर ने स्पष्ट किया कि वे आज मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगें रखेंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे बिलासपुर में डीएफओ (DFO) कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरने पर बैठेंगे।