शिमला।
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला का चौड़ा मैदान आज पेंशनरों के भारी आक्रोश का गवाह बना। प्रदेश के कोने-कोने से जुटे हजारों पेंशनरों ने सुक्खू सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उग्र प्रदर्शन किया।
अपनी लंबित मांगों को लेकर पेंशनर इतने नाराज थे कि उन्होंने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगें जल्द पूरी नहीं हुईं, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप धारण करेगा।
पेंशनरों के इस उग्र प्रदर्शन के पीछे वित्तीय लाभों में हो रही देरी और सरकार के कथित टालमटोल वाले रवैये को मुख्य कारण बताया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगें हैं पेंशनरों का आरोप है कि उन्हें संशोधित वेतनमान के अनुसार मिलने वाला एरियर (Arrear) अभी तक नहीं मिला है।
महंगाई भत्ते (DA) की लंबित किस्तों को जारी न करना पेंशनरों की नाराजगी का एक बड़ा कारण है। कई महीनों से लंबित मेडिकल प्रतिपूर्ति (Medical Reimbursement) के बिलों का भुगतान न होना। पेंशनरों का कहना है कि सरकार हर बार वित्तीय तंगी का बहाना बनाकर उनके हक को रोक रही है, जिसे अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पेंशनर कल्याण संघ के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में बुजुर्गों का जोश देखने लायक था। प्रदर्शनकारी पेंशनरों ने विधानसभा के समीप चौड़ा मैदान में डेरा डाल दिया, जिससे यातायात व्यवस्था भी काफी प्रभावित हुई। पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए थे और प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बैरिकेडिंग की गई थी।
पेंशनर संघ के नेताओं ने अपने संबोधन में कहा कि पेंशनर समाज का वह हिस्सा हैं जिन्होंने जीवन भर प्रदेश की सेवा की है, लेकिन आज उन्हें अपने हक के लिए सड़कों पर उतरना पड़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया यह केवल एक सांकेतिक प्रदर्शन नहीं है। यदि सरकार ने हमारी मांगों पर तुरंत गौर नहीं किया, तो आगामी समय में पेंशनर सचिवालय का घेराव करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।