मंडी।
कहते हैं कि अगर इरादे फौलादी हों और परिवार का साथ मिले, तो दुनिया की कोई भी जिम्मेदारी सपनों की उड़ान नहीं रोक सकती। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला के Arthi गांव की बनिता कुमारी ने इस कहावत को सच कर दिखाया है। एक पत्नी और माँ की दोहरी जिम्मेदारी निभाते हुए बनिता ने TGT मेडिकल की परीक्षा उत्तीर्ण कर समाज के सामने महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल पेश की है।
शादी और बच्चे के बाद भी नहीं थमा पढ़ाई का कारवां
अक्सर देखा जाता है कि शादी और बच्चों की जिम्मेदारी के बाद महिलाएं अपने करियर को पीछे छोड़ देती हैं, लेकिन बनिता ने हार नहीं मानी। उन्होंने घर के कामकाज और छोटे बच्चे की देखभाल के साथ-साथ अपनी पढ़ाई को जारी रखा। उनकी सफलता की खास बात यह रही कि उन्होंने विषम परिस्थितियों में भी एजुकेशन पॉइंट एकेडमी के माध्यम से अपनी तैयारी को धार दी।
पति का सहयोग बना सफलता की सीढ़ी
बनिता कुमारी अपनी इस उपलब्धि का सबसे बड़ा श्रेय अपने पति को देती हैं। उनका मानना है कि एक छोटे बच्चे के साथ पढ़ाई जारी रखना नामुमकिन था, यदि उनके पति ने हर कदम पर उनका सहयोग न किया होता। दिन भर घर की जिम्मेदारियां निभाने के बाद, बनिता ने देर रात तक पढ़ाई की और ऑनलाइन क्लासेस के माध्यम से संस्थान से लगातार जुड़ी रहीं।
एक माँ और पत्नी होने के नाते चुनौतियां बहुत थीं, लेकिन मेरे परिवार और खासकर मेरे पति के अटूट विश्वास ने मुझे रुकने नहीं दिया। एजुकेशन पॉइंट एकेडमी के मार्गदर्शन ने मेरे लक्ष्य को आसान बना दिया। — बनिता कुमारी, नवनियुक्त TGT मेडिकल
बनिता की कहानी उन हजारों महिलाओं के लिए प्रेरणा है जो पारिवारिक दायित्वों के कारण अपने सपनों को अधूरा छोड़ देती हैं। उन्होंने साबित किया कि चयन होने तक मैदान में डटे रहना ही सफलता की कुंजी है। उनकी इस उपलब्धि पर आरती गांव में खुशी का माहौल है और शिक्षा जगत में उनकी मेहनत की सराहना हो रही है।