कांगड़ा।
जिला कांगड़ा की विधानसभा नूरपुर के अंतर्गत आने वाली पंचायत खैरियां में आज जश्न का माहौल दिवाली जैसा रहा। अवसर था गांव के होनहार बेटे और स्टार कबड्डी खिलाड़ी अंकुश ठाकुर की घर वापसी का, जो नेशनल कबड्डी चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल (कांस्य पदक) जीतकर लौटे हैं।
अंकुश के गांव पहुंचते ही पूरा क्षेत्र ढोल-नगाड़ों की थाप से गूंज उठा। ग्रामीणों ने फूल-मालाओं और मिठाइयों के साथ अपने नायक का ऐतिहासिक स्वागत किया।
मध्यप्रदेश के सतना जिले में आयोजित इस प्रतिष्ठित नेशनल चैंपियनशिप का आयोजन कबड्डी फेडरेशन द्वारा किया गया था। इस प्रतियोगिता की खासियत यह थी कि इसमें देशभर की केवल चुनिंदा सुपर-8 टीमों को ही खेलने का मौका मिला था। हिमाचल प्रदेश की टीम ने शानदार खेल दिखाते हुए सेमीफाइनल तक का सफर तय किया और देशभर में तीसरा स्थान हासिल कर प्रदेश की झोली में ब्रॉन्ज मेडल डाला।
अंकुश ठाकुर: कांगड़ा के पहले मेडल विजेता खिलाड़ी
14 खिलाड़ियों की इस टीम में अंकुश ठाकुर एक मुख्य रेडर/डिफेंडर के रूप में उभरे। विशेषकर चंडीगढ़ के खिलाफ मैच में उनके प्रदर्शन ने टीम की जीत की राह आसान की। अंकुश की यह उपलब्धि इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि वह कांगड़ा जिले से खेलने वाले दूसरे खिलाड़ी जरूर हैं, लेकिन नेशनल स्तर पर मेडल जीतने वाले पहले खिलाड़ी बन गए हैं।
परिजनों और ग्रामीणों ने जताया गर्व
अंकुश की सफलता पर उनके पिता केवल सिंह भावुक नजर आए। उन्होंने कहा यह जीत सिर्फ हमारे परिवार की नहीं, बल्कि पूरे हिमाचल और नूरपुर क्षेत्र की है। मैं कबड्डी फेडरेशन, चयन समिति और पूरी टीम को इस बड़ी उपलब्धि के लिए बधाई देता हूँ।
वहीं, पूर्व प्रधान विक्रम सिंह बिट्टू और पूर्व उप-प्रधान राहुल कुमार सहित स्थानीय युवाओं ने खुशी जाहिर करते हुए कहा कि अंकुश ने पूरे देश में जिला कांगड़ा का नाम रोशन किया है। अब क्षेत्रवासियों को उम्मीद है कि अंकुश जल्द ही प्रो कबड्डी लीग (PKL) के मैट पर अपना जलवा बिखेरते नजर आएंगे।
जश्न के इन पलों के बीच एक गंभीर सवाल भी उठ रहा है। एक तरफ प्रदेश सरकार 'नशा छोड़ो, खेल खेलो' का नारा बुलंद कर रही है, वहीं दूसरी तरफ नेशनल स्तर पर मेडल लाने वाले इन 14 खिलाड़ियों के भविष्य को लेकर कोई स्पष्ट नीति नजर नहीं आती।
क्या मेडल जीतने वाले खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी या उचित प्रोत्साहन मिलेगा? यदि प्रतिभाशाली खिलाड़ियों का भविष्य सुरक्षित नहीं होगा, तो आने वाली पीढ़ी खेलों की ओर कैसे प्रेरित होगी? क्या सरकार इन युवाओं को केवल नशे के खिलाफ ब्रांड एंबेसडर बनाएगी या उनके करियर को भी नई उड़ान देगी?
अंकुश ठाकुर की यह जीत नूरपुर के युवाओं के लिए प्रेरणा तो है, लेकिन अब गेंद सरकार के पाले में है कि वह इस 'कांस्य पदक' की चमक को 'सोने' जैसे भविष्य में कैसे बदलती है।