नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सबसे विश्वसनीय पूर्व नौकरशाहों में शुमार तरुण कपूर को केंद्र सरकार में एक बार फिर बहुत बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है। कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने प्रधानमंत्री के सलाहकार के रूप में उनके कार्यकाल को एक साल का सेवा विस्तार (Extension) देने की मंजूरी दे दी है।
केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आदेशों के अनुसार, वरिष्ठ अधिकारी तरुण कपूर का यह नया कार्यकाल 10 जून, 2026 से प्रभावी होगा। हिमाचल प्रदेश से ताल्लुक रखने वाले इस तेजतर्रार अधिकारी पर प्रधानमंत्री का यह भरोसा प्रशासनिक हलकों में उनकी मजबूत पकड़ को दर्शाता है।
आखिर क्यों कहा जाता है इन्हें 'सोलर मैन'?
हिमाचल प्रदेश कैडर के 1987 बैच के रिटायर्ड आईएएस (IAS) अधिकारी तरुण कपूर को प्रशासनिक गलियारों में 'आईएएस सोलर मैन' के नाम से भी जाना जाता है। नवंबर 2021 में पेट्रोलियम व प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव पद से सेवानिवृत्त हुए तरुण कपूर ने देश में सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना
को धरातल पर उतारने के लिए मुख्य 'ब्लू प्रिंट' तैयार किया था। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में उनके इसी अभूतपूर्व योगदान और दूरदर्शी सोच के कारण उनके साथी अधिकारी और विशेषज्ञ उन्हें आदर से 'सोलर मैन' पुकारते हैं।
ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव के सूत्रधार और पारिवारिक पृष्ठभूमि
तरुण कपूर की विशेषज्ञता को देखते हुए केंद्र सरकार की 'एनर्जी ट्रांसमिशन एडवाइजरी कमेटी' का गठन भी उन्हीं की अध्यक्षता में किया गया था। इस कमेटी का मुख्य उद्देश्य भारत में हाइड्रोजन, बायो ईंधन और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों की हिस्सेदारी को बढ़ाना है।
पारिवारिक और व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो तरुण कपूर मूल रूप से शिमला शहर के केलेस्टन (लांगवुड) क्षेत्र के रहने वाले हैं। उनके पिता बिजली विभाग में कार्यरत रहे हैं, वहीं तरुण कपूर की स्कूली शिक्षा मंडी और पालमपुर से पूरी हुई है। अपनी तकनीकी और प्रशासनिक क्षमता के बल पर वे हमेशा सरकार के संकटमोचक रहे हैं।
कैबिनेट समिति के आदेश और सचिव स्तर का रैंक
केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय की ओर से जारी आदेशों के मुताबिक, कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में प्रधानमंत्री के सलाहकार के तौर पर तरुण कपूर की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण माना है।
भारत सरकार में उनका रैंक और स्केल 'सचिव' (Secretary) स्तर का होगा। गौरतलब है कि प्रारंभ में इस पद पर उनकी नियुक्ति कार्यभार संभालने की तिथि से दो वर्षों के लिए की गई थी, जिसे अब उनकी उत्कृष्ट कार्यशैली और रणनीतिक कौशल को देखते हुए आगे बढ़ाया गया है। तीसरी बार मिली इस बड़ी जिम्मेदारी से हिमाचल प्रदेश का नाम भी राष्ट्रीय स्तर पर चमका है।