नूरपुर (कांगड़ा)
हिमाचल प्रदेश के मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त करने और उनकी आय का उपयोग हिंदू धर्म के कार्यों में करने की मांग अब जोर पकड़ने लगी है। जिला कांगड़ा के नूरपुर स्थित लोक निर्माण विभाग के विश्राम गृह में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू से मुलाकात की और उन्हें इस संबंध में एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा।
मंदिर केवल आस्था नहीं, संस्कृति के आधार: उदय पठानिया
विश्व हिंदू परिषद के प्रांत सहमंत्री उदय पठानिया के नेतृत्व में पहुंचे पदाधिकारियों ने अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से रखा। उन्होंने कहा कि मंदिर समाज की संस्कृति, परंपरा और सामाजिक व्यवस्था के मुख्य आधार स्तंभ हैं।
प्रतिनिधिमंडल की मुख्य मांगें:
प्रदेश के मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से पूरी तरह मुक्त किया जाए।
मंदिरों से प्राप्त आय का उपयोग केवल गौशालाओं, वैदिक पाठशालाओं और धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यों के लिए हो।
मंदिरों का संचालन श्रद्धालुओं की भावनाओं और धर्मशास्त्रों के अनुरूप होना चाहिए।
हमने केंद्रीय मंत्री से आग्रह किया है कि मंदिरों की आय का एक-एक पैसा हिंदू धर्म और समाज के उत्थान में खर्च हो। वर्तमान में सरकारी नियंत्रण के कारण श्रद्धालुओं की भावनाओं का पूर्ण सम्मान नहीं हो पा रहा है।
केंद्र सरकार के समक्ष उठेगा मुद्दा: किरेन रिजिजू
प्रतिनिधिमंडल की बातों को सुनने के बाद केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने उन्हें आश्वस्त किया कि वे इस विषय की गंभीरता को समझते हैं। उन्होंने कहा कि इन मांगों को केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से रखा जाएगा और इस पर उचित विचार-विमर्श किया जाएगा।
सियासी सरगर्मी बढ़ने के संकेत
नूरपुर में सौंपे गए इस ज्ञापन के बाद प्रदेश में मंदिरों की आय और उनके प्रबंधन को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने के आसार हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में यह मुद्दा हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा केंद्र बिंदु बन सकता है।