स्वारघाट।
हिमाचल प्रदेश और पड़ोसी राज्य पंजाब में पिछले दो दिनों से जारी मूसलाधार और रुक-रुक कर हो रही बारिश ने जनजीवन को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। उपमंडल स्वारघाट के चंगर क्षेत्र, जो पंजाब की सीमा से सटा हुआ है, वहां मौसम ने ऐसी करवट ली है कि लोग मार्च के महीने में दिसंबर-जनवरी जैसी कड़ाके की ठंड का अनुभव कर रहे हैं।
महज कुछ दिन पहले तक इस क्षेत्र में पारा चढ़ने लगा था। चंगर के इलाकों में लोगों ने गर्मी के कारण पंखे और एसी (AC) तक चलाने शुरू कर दिए थे और अपने ऊनी कपड़े संदूक में समेट दिए थे। लेकिन पिछले 48 घंटों की बारिश ने पूरी तस्वीर बदल दी है। अब हालात ऐसे हैं कि लोगों को दोबारा भारी जैकेट और गर्म कपड़े निकालने पड़े हैं।
मौसम का यह बदलाव किसानों के लिए दोहरी मार लेकर आया है। चंगर क्षेत्र में गेहूं की बंपर पैदावार होती है, साथ ही सरसों, चना और लहसुन जैसी फसलें भी बड़े पैमाने पर उगाई जाती हैं। किसानों का मानना है कि यदि यही बारिश 20-25 दिन पहले हुई होती, तो गेहूं की फसल के लिए यह 'अमृत' समान होती। वर्तमान में फसलें पूरी तरह पक चुकी हैं और किसान कटाई की तैयारी में थे।
तेज हवाओं और भारी बारिश के कारण कई क्षेत्रों में गेहूं की तैयार फसल खेतों में बिछ गई है। यदि बारिश का यह दौर अगले एक-दो दिन और जारी रहा, तो कटी हुई और पक चुकी फसलें खेतों में ही सड़ सकती हैं, जिससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।