शिमला।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का छठा दिन हंगामे की भेंट चढ़ गया। शून्य काल के दौरान 'चिट्टा' और बढ़ते नशे के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी झड़प हुई। सरकार के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी दल भाजपा ने सदन के भीतर नारेबाजी की और कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए वॉकआउट कर दिया।
सदन से बाहर पत्रकारों से बात करते हुए नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार के साढ़े तीन साल के कार्यकाल में नशा प्रदेश के कोने-कोने और गांव-गांव तक पहुँच चुका है।
जयराम ठाकुर ने कहा, जब हमने युवाओं की नशे से हो रही मौतों का गंभीर मुद्दा सदन में उठाया, तो मुख्यमंत्री, मंत्री और अधिकारी हंसते नजर आए। यह सरकार का गैर-जिम्मेदाराना रवैया दर्शाता है।
उन्होंने सरकार पर केवल 'वॉकथॉन' जैसे आयोजनों के नाम पर करोड़ों रुपये बर्बाद करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि स्कूली बच्चों को घंटों इंतजार करवाकर केवल दिखावा किया जा रहा है, जबकि जमीनी हकीकत भयावह है।
नेता प्रतिपक्ष ने दावा किया कि बिना उचित जांच के पुलिस कर्मियों को एसटीएफ (STF) में तैनात किया गया, जिनमें से कुछ खुद नशे के कारोबार में संलिप्त पाए गए हैं।
नशे के मुद्दे के साथ-साथ जयराम ठाकुर ने एक और विस्फोटक आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि प्रदेश पुलिस नशा तस्करों को पकड़ने के बजाय विपक्ष के विधायकों और नेताओं के फोन टैप करने में लगी है।
अधिकारी केवल सरकार को खुश करने के लिए विपक्षी नेताओं को सर्विलांस पर रख रहे हैं। राज्यसभा चुनाव के दौरान भी बड़े पैमाने पर फोन की निगरानी की गई थी, जो लोकतंत्र के लिए घातक है। — जयराम ठाकुर, नेता प्रतिपक्ष
विपक्ष का दावा है कि उनके समय में नशा तस्करों के खिलाफ जो कड़ी कार्रवाई शुरू हुई थी, वह अब सुस्त पड़ गई है। वहीं, सदन के भीतर नारेबाजी करते हुए भाजपा विधायकों ने आरोप लगाया कि सरकार नशे को रोकने में पूरी तरह विफल रही है और केवल आंकड़ों की बाजीगरी कर रही है।