मंडी
स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) जिला कमेटी मंडी ने सरदार पटेल विश्वविद्यालय (SPU) मंडी प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। संगठन ने विश्वविद्यालय द्वारा बी.एड.
(B.Ed) द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षाओं की तिथियों को अत्यंत जल्दबाजी में घोषित करने के फैसले की कड़ी निंदा की है। SFI का मानना है कि यह निर्णय न केवल छात्रों के शैक्षणिक हितों के विरुद्ध है, बल्कि राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) के निर्धारित मानकों और शिक्षा की गुणवत्ता के साथ भी गंभीर समझौता है।
संगठन ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि बी.एड. प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं 22 अप्रैल 2026 को समाप्त हुई थीं, जबकि विश्वविद्यालय ने द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षाएं 9 जून 2026 से आयोजित करने का कार्यक्रम घोषित कर दिया है।
इसका सीधा मतलब यह है कि पूरे सेमेस्टर की पढ़ाई, प्रायोगिक कार्य तथा परीक्षा की तैयारी के लिए छात्रों को मात्र 46 दिनों का समय दिया गया है, जो किसी भी दृष्टि से पर्याप्त नहीं है।
SFI के जिला सचिव दीपक कुमार ने यह भी उजागर किया कि NCTE के नियमों के अनुसार द्वितीय सेमेस्टर में एक महीने (30 दिन) की 'स्कूल ऑब्जर्वेशन एवं टीचिंग प्रैक्टिस' (TP) अनिवार्य होती है, लेकिन प्रशासन ने इसे महज 10 दिनों में ही पूरा करवा दिया।
संगठन ने सवाल उठाया है कि जब एक सेमेस्टर की नियमित पढ़ाई के लिए कम से कम 4 से 5 महीने का समय निर्धारित होता है, तो मात्र डेढ़ महीने के भीतर पूरा सिलेबस और प्रैक्टिकल कैसे पूरा करवा दिया गया? यह स्पष्ट रूप से शिक्षा व्यवस्था को सिर्फ एक औपचारिकता तक सीमित करने का प्रयास है, जिससे हजारों छात्र मानसिक तनाव और असमंजस की स्थिति में हैं।
छात्र संगठन ने परीक्षाओं को तुरंत स्थगित करने, पाठ्यक्रम पूरा करने के लिए पर्याप्त समय देने और NCTE के नियमों के तहत गतिविधियां पूरी करवाने की मांग की है। SFI जिला कमेटी मंडी ने विश्वविद्यालय प्रशासन को कड़े शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि छात्रों की इन जायज मांगों पर तुरंत कोई सकारात्मक और सहानुभूतिपूर्वक निर्णय नहीं लिया
गया, तो संगठन छात्रों को साथ लेकर एक व्यापक लोकतांत्रिक आंदोलन छेड़ने के लिए मजबूर होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी।